
बारिश (फाइल फोटो-IANS)
Chhattisgarh Rain Alert: सावन में रूठे इंद्रदेव भादो माह में आखिरकार मेहरबान हो गए। तीन घंटे की झमाझम बारिश ने बालोद जिले के किसानों को बड़ी राहत दी है। शाम 5 बजे शुरू हुई बारिश 7 बजे तक होती रही। इसके बाद देर रात तक रुक-रुककर बौछारें पड़ती रहीं। यह भादो माह की पहली तेज बारिश है, जिसे कृषि विशेषज्ञ धान की फसल के लिए संजीवनी बता रहे हैं।
पिछले 15 दिनों से जिले में बारिश का दौर थमा हुआ था। खेतों में दरारें पड़ने लगी थीं और धान की फसल पीली पड़ने लगी थी। किसान टकटकी लगाकर आसमान की ओर देख रहे थे। इस बारिश ने न सिर्फ फसलों को जीवनदान दिया, बल्कि किसानों के चेहरों पर भी खुशी लौटा दी।
मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 3 से 4 दिनों तक बालोद जिले में हल्की से मध्यम बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे धान के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को भी फायदा होगा।
तेज बारिश का सीधा असर जिले के जलाशयों पर भी पड़ा है। सभी छोटे-बड़े जलाशयों में तेजी से जलभराव हो रहा है। जिला प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, मटियामोती जलाशय 100 प्रतिशत भर चुका है और ओवरफ्लो की स्थिति में है।
बारिश से ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह है। कृषि विभाग ने भी किसानों को सलाह दी है कि इस समय खेत में पानी रोककर रखें और कीट-रोगों पर नजर रखें।
पिछले सप्ताह किसानों ने सिंचाई के लिए जलाशयों से पानी छोड़ने की मांग की थी। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग ने तांदुला, खरखरा और गोंदली जलाशय के गेट खोल दिए हैं। सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन ने बताया कि किसानों की मांग के अनुसार नहरों में पानी छोड़ा जा रहा है। जरूरत पड़ने पर पानी की मात्रा बढ़ाई या घटाई जाएगी।
इस मानसून सीजन में जिले में अब तक औसत 930.6 मिमी बारिश दर्ज की जा चुकी है, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर मानी जा रही है। ब्लॉकवार बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति काफी अच्छी है। सबसे ज्यादा बारिश मार्री-बंगला-देवरी ब्लॉक में 1075.9 मिमी दर्ज की गई है। डौंडीलोहारा में 1017.8 मिमी बारिश हुई है। अर्जुंदा में 943.3 मिमी, बालोद ब्लॉक में 919.1 मिमी, गुंडरदेही में 912.2 मिमी, गुरुर में 872.3 मिमी और डौंडी में 773.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है।
बारिश के बाद किसानों के चेहरे पर संतोष दिख रहा है। गुंडरदेही के किसान रामकुमार साहू ने बताया कि धान में दाना भरने का समय है। ऐसे में यह बारिश बहुत जरूरी थी। एक सप्ताह और बारिश नहीं होती तो फसल को नुकसान होता। अब फसल सुधर जाएगी।
सिंचाई विभाग के ईई पीयूष देवांगन के मुताबिक, तीनों बड़े जलाशयों के गेट किसानों की मांग पर खोले गए हैं। जरूरत के हिसाब से पानी की मात्रा बढ़ाई या घटाई जाएगी।
Updated on:
11 Sept 2026 01:16 pm
Published on:
11 Sept 2026 01:16 pm
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