
विज्ञान भी मानता है संस्कार में है पॉवर पाइंट, इसलिए गर्भ से मां करे तैयारी
बालोद. आओ गढ़ें संस्कारवान पीढ़ी में महिलाओं सहित युवतियों में जाना कि किस तरह संस्कार विज्ञान में भी पॉवर पाइंट है। गर्भवती महिलाएं कैसे अपने गर्भ से ही बच्चों में सुसंस्कार डाल सकते हैं। वक्ताओं ने कहा पहले खुद में डालें संस्कार, अपने खान-पान, रहन-सहन, आदत-व्यवहार में सुधार लाएं, आध्यात्म से नाता जोड़ंगेे, तो बच्चे भी संस्कारवान और सभ्य बनेंगे।
वक्ताओं ने बताए वैज्ञानिक तर्क
गायत्री परिवार महिला प्रकोष्ठ के गायत्री शक्ति पीठ में आयोजित कार्यक्रम में आए वक्ताओं ने संस्कार पर विचार रखते हुए इसके वैज्ञानिक तर्क बताए। गायत्री परिवार महिला प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित कार्यक्रम का शुभारंभ मां गायत्री व गुरुदेव पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य एवं माता भगवती देवी शर्मा के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलन कर की गई। मुख्य अतिथि डिप्टी कलक्टर प्रियंका वर्मा व विशेष अतिथि महिला प्रकोष्ठ छत्तीसगढ़ गायत्री परिवार सरला कोसरिया, मुख्य प्रबंधन ट्रस्टी गायत्री शक्तिपीठ दुर्ग विनीता तिवारी, मुख्य प्रशिक्षक रुपाली गांधी ने संस्कार पर विचार रखे। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला समन्वयक गायत्री परिवार बालोद डीएल साव ने की।
गर्भ के दौरान माता का विचार हो अच्छा
मुख्य अतिथि डिप्टी कलक्टर वर्मा ने कहा कि गर्भ से ही बच्चों को श्रेष्ठ विचार प्रदान करना आवश्यक है। श्रेष्ठ विचार से ही श्रेष्ठ व्यक्ति का निर्माण होता है। अच्छा सोचना, अच्छा बोलना ही नहीं अच्छा काम भी करना चाहिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम की महिला प्रकोष्ठ प्रभारी सरला कोसरिया ने कहा कि बच्चों को संस्कार गर्भ से देना आवश्यक है। अन्यथा बच्चा आगे चलकर कुसंस्कारी, भ्रष्टाचारी सहित गलत मार्ग पर चलने वाला हो सकता है। ऐसे में आगे परिवार, समाज, राष्ट्र पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। विघटित की स्थिति बनेगी। इसलिए गर्भ से ही बच्चे में संस्कार आए इसके लिए लगातार प्रयास आवश्यक है। पुंसवन संस्कार सभी गर्भवती माताओं का होना आवश्यक है।
माताओं के लिए कौन सा योग सहज व अच्छा है को बताया
कार्यक्रम की मुख्य प्रशिक्षक रुपाली गांधी ने प्रथम विषय गर्भोत्सव कार्यक्रम एवं वैज्ञानिक प्रतिपादन विषय पर जानकारी प्रदान की। इस दौरान द्वितीय विषय पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने गर्भवती स्त्रियों के लिए कौन सा योग सहज और शरीर के लिए अच्छा होता इसकी जानकारी दी गई। तृतीय विषय के तहत गर्भवती महिलाओं की दैनिक दिनचर्या, आहार-विहार किस तरह हो पर मार्गदर्शन किया गया। वक्ताओं ने ऊषा पान, तरु पुत्र, तरु मित्र, मानकर पुंसवन संस्कार के दिन पीपल पौधे के रोपण का महत्व आदि की विस्तृत जानकारी प्रशिक्षक मीनाक्षी विश्वास ने दी।
सकारात्मक विचारों के लोगों से रखें मेल-मुलाकात
चतुर्थ विषय के तहत गर्भ संवाद की विविध विधि पर रुपाली गांधी ने जानकारी दी। बताया कि संस्कारी संतान प्राप्ति के लिए अच्छे पुस्तक का पठन करना चाहिए। अच्छे संगीत के श्रवण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। पति-पत्नी की आपसी विचारों का तालमेल व बातचीत, अच्छे विचारों से संबंधित चर्चाओं में भागीदारी देनी चाहिए। वहीं सकारात्मक विचारों के लोगों से मेल-मुलाकात के साथ गर्भ संवाद की जानकारी प्रशिक्षण में दी गई। आभार प्रदर्शन प्रभारी जिला महिला प्रकोष्ठ रूपा साहू ने किया।
Updated on:
19 Sept 2018 12:25 am
Published on:
19 Sept 2018 08:10 am
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