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महानरेगा पर आरोप निराधार, मुख्यमंत्री भाषा पर संयम रखें: जोशी

मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए, अन्यथा उन्हें राहुल गांधी Rahul Gandhi की तरह कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

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मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सिद्धरामय्या जैसे कांग्रेस नेताओं को महात्मा गांधी का नाम लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या Siddaramaiah के केंद्र की एनडीए सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Scheme (मनरेगा) का नाम बदलकर महात्मा गांधी की एक बार फिर हत्या Murder करने की कोशिश के आरोप को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को अपनी भाषा पर नियंत्रण रखना चाहिए, अन्यथा उन्हें राहुल गांधी Rahul Gandhi की तरह कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

नाम लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं

केंद्रीय मंत्री Pralhad Joshi ने कहा कि सिद्धरामय्या जैसे कांग्रेस नेताओं को महात्मा गांधी का नाम लेने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस Congress ने पहले भी कई बार महात्मा गांधी का अपमान किया है। जोशी के अनुसार, एक अनुमान के मुताबिक नेहरू-गांधी परिवार के सदस्यों के नाम पर 300 से अधिक परियोजनाएं या स्मारक हैं, जबकि महात्मा गांधी के नाम पर बहुत कम हैं।

बयान केवल अपनी पार्टी के नेताओं को खुश करने के लिए

जोशी ने स्पष्ट किया कि नया वीबी-जी-राम अधिनियम रोजगार सृजन और आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार D K Shivakumar जैसे नेता इस तरह के बयान केवल अपनी पार्टी के नेताओं को खुश करने के लिए दे रहे हैं।

मनरेगा पिछले 20 वर्षों से चल रही है

उन्होंने बताया कि मनरेगा पिछले 20 वर्षों से चल रही है और केंद्र सरकार ने इसे और प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक सुधार किए हैं। बदलावों का मुख्य उद्देश्य रोजगार और आजीविका को सशक्त करना है। नई योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा मिलेगा और काम के दिनों की संख्या बढ़ाकर 125 की जाएगी। उन्होंने कहा कि पिछली व्यवस्था में कई अनियमितताएं और फंड के दुरुपयोग के मामले सामने आए थे, जिन्हें नई योजना में जीपीएस तकनीक के जरिए रोका जाएगा। ग्राम पंचायतों को यह अधिकार होगा कि वे तय करें कि कौन-से कार्य किए जाएं, इसमें कोई केंद्रीकृत नियंत्रण नहीं होगा।