10 सितंबर 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

‘वंदे मातरम’ पर कर्नाटक सरकार का बड़ा फैसला, सरकारी कार्यक्रमों में गाए जाएंगे सिर्फ 2 पद

Vande Mataram Controversy: कर्नाटक सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर नया नियम तय किया है। आम कार्यक्रमों में सिर्फ पहले दो पद गाए जाएंगे, जबकि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले खास कार्यक्रमों में पूरा गीत गाया जाएगा।
2 min read
Google source verification
Vande Mataram

बेंगलुरु में एक कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और अन्य नेता। (फाइल फोटो-IANS)

Karnataka Government:'वंदे मातरम' को लेकर देश में चल रही सियासी बहस के बीच कर्नाटक सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। राज्य सरकार ने सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के गायन को लेकर अलग नियम तय किए हैं। इसके तहत आम सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सिर्फ पहले दो पद गाए जाएंगे। वहीं, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले खास कार्यक्रमों में पूरा गीत गाया जाएगा।

कर्नाटक सरकार ने यह आदेश 8 सितंबर 2026 को जारी किया है। आदेश में सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' बजाने या गाने की व्यवस्था का भी जिक्र किया गया है।

आम कार्यक्रमों में सिर्फ दो पद

राज्य सरकार के सामान्य कार्यक्रमों और समारोहों में 'वंदे मातरम' के शुरुआती दो पद ही गाए जाएंगे। इसका मतलब यह है कि राज्य सरकार के रोजमर्रा के आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे छह पदों का गायन नहीं होगा।

सरकार ने इस व्यवस्था को सामान्य राजकीय कार्यक्रमों के लिए रखा है। यानी किसी राज्य स्तरीय सरकारी समारोह में अगर राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल मौजूद नहीं हैं, तो वहां 'वंदे मातरम' के पहले दो पद ही गाए जाएंगे।

बड़े नेताओं की मौजूदगी में पूरा गीत

हालांकि, डीके शिवकुमार सरकार ने कुछ कार्यक्रमों के लिए अलग नियम बनाया है। राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाए जाएंगे। केंद्र सरकार की ओर से प्रतिनिधित्व वाले खास कार्यक्रमों में भी पूरे गीत के गायन की व्यवस्था रखी गई है। इस तरह कर्नाटक सरकार ने कार्यक्रम के महत्व और उसमें शामिल होने वाले संवैधानिक पदों के आधार पर नियम अलग कर दिए हैं।

केंद्र के रुख के बीच आया फैसला

कर्नाटक सरकार का यह आदेश ऐसे समय आया है, जब 'वंदे मातरम' के सभी छह पद गाने को लेकर केंद्र और विपक्ष के बीच राजनीतिक बहस चल रही है। इसी वजह से राज्य सरकार के इस फैसले को सिर्फ प्रशासनिक आदेश के तौर पर नहीं देखा जा रहा है।

'वंदे मातरम' लंबे समय से देश की राजनीति में भावनाओं और राष्ट्रवाद से जुड़ा मुद्दा रहा है। अब कर्नाटक में सामान्य सरकारी कार्यक्रमों के लिए सिर्फ दो पद और खास संवैधानिक कार्यक्रमों के लिए सभी छह पद तय किए जाने से इस मुद्दे पर सियासत और तेज होने की संभावना है।

फिलहाल कर्नाटक सरकार के आदेश ने यह साफ कर दिया है कि राज्य के सामान्य सरकारी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम' का पूरा गीत गाना जरूरी नहीं होगा। खास मौकों पर ही सभी छह पद गाए जाएंगे। अब इस फैसले पर बीजेपी और दूसरे दलों की प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी।

बड़ी खबरें

View All

बैंगलोर

कर्नाटक

ट्रेंडिंग