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आबादी के आधार पर खुलेंगे थाने

प्रदेश में आबादी के आधार पर थाने खोले जाएंगे और पुलिस की नियुक्ति होगी
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 4 Feb 2018, 12:30 AM IST

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बेंगलूरु. गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि प्रदेश में आबादी के आधार पर थाने खोले जाएंगे और पुलिस की नियुक्ति होगी। उन्होंने शनिवार को काडूगोंडनहल्ली थाने के नए भवन का लोकार्पण करते हुए यह बात कही।
रेड्डी ने कहा कि प्रदेश में फिलहाल 36 नए थानों की जरूरत है और हर साल थानों की संख्या बढ़ाई जाएगी। अब भी पुलिस विभाग में 22 हजार से अधिक पुलिस पद रिक्त हैं और पिछले साढ़े चार साल में 30 हजार नियुक्तियां की गई। 11 हजार मकानों का निर्माण किया गया। हर साल एक हजार से निरीक्षक से सिपाही स्तर के कर्मचारी सेवानिवत्त होते हैं। जैसे-जैस पद रिक्त होंगे, उसी तरह भर्ती की जाएगी।


पुलिस की छवि बदलने का प्रयास
उन्होंने कहा कि जनता के मन में पुलिस थानों की छवि बदलने के लिए सभी थानों को नया रूप दिया जा रहा है और उन्हें अधिक जनहितैषी बनाने के प्रयास जारी हैं। पुलिस को जनता के करीब लाने के लिए कई नए तकनीकी बदलाव किए जा रहे हैं। जल्दी ही किसी को रिपोर्ट दर्ज कराने पुलिस थाने जाने की जरूरत नहीं होगी। लोग अपने मोबाइल फोन से ही रिपोर्ट दर्ज करा सकेंगे। उन्हें शीघ्र एफ.आई.आर.की कॉपी मिल जाएगी। मोबाइल पर मामले की जांच, आरोपी की गिरफ्तारी और आरोप पत्र दाखिल होने तक सभी विवरण दिए जाएंगे। यह सुविधा अभी केवल बेंगलूरु में शुरू की गई है। इसके पूरे प्रदेश में विस्तार का प्रयास जारी है। उन्होंने कहा कि एक साल में 16,000 सिपाहियों और सहायक उप निरीक्षकों को पदोन्नति दी गई है। सिपाहियों को 20 साल से पदोन्नति नही मिली थी। अब वे सेवा निवृत्त होने तक निरीक्षक या उपाधीक्षक बन सकते हैं। पुलिस विभाग में छठे वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ.जी.परमेश्वर ने पुलिस कर्मियों के वेतन बढ़ाने की सिफारिश की थी। रेड्डी ने कहा कि प्रदेश में आपराधिक मामलों में कमी आई है। प्रदेश में कानून-व्यवस्था अच्छी है।
बेंगलूरु विकास मंत्री के.जे.जार्ज, महापौर संपत राज, विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति, पुलिस आयुक्त टी.सुनील कुमार और अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

बेंगलूरु केंद्रीय जेल में 2 और चिकित्सक होंगे नियुक्त
बेंगलूरु. सरकार ने परप्पन अग्रहार केन्द्राय जेल को दो अतिरिक्त चिकित्सक नियुक्त करने का फैसला किया है। जेल में स्थाई रूप से चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने पर कई कैदियों को सही समय पर उपचार नहीं मिल रहा है और कैदी कई बीमारियों का शिकार है।
गृह मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी के चलते प्रदेश की कई जेलों में भी चिकित्सक कम हैं। सरकार ने सेवा निवृृत्त सरकारी चिकित्सकों की ठेके पर सेवा लेने का फैसला लिया है। जिन जिला जेेलों में चिकित्सक नहीं है, वहांं ठेके पर नियुक्ति का अधिकार जिलाधिकारियों को दिया गया है।
प्रदेश की आठ केन्द्रीय जेलो में कुल 14498 कैदी हैं। उनमें 690 कैदी विभिन्न बीमारियों का शिकार है। उनमें 80 कैदियों को जानलेवा बीमरियां हैं। कैदी एचआईवी पॉजिटिव, कुष्ठरोग, मलेरिया, डेंगू, कैंसर और अन्य बीमरियों का शिकार है। जेलो में केवल 9 चिकित्सक पदस्थ हैं। परप्पन अग्रहार जेल में दो, कलबुर्गी जेल में दो, मैसूरु जेल में एक, और अन्य पांच जेलों में केवल चार चिकित्सक है। इन रोगियों का शीघ्र उपचार करने के लिए सेवा निवृत्त सरकारी चिकित्सकों को नियुक्त करने सूची तैैयार की जा रही है। हर एक चिकित्सक सभी बीमारियों का इलाज नहीं कर सकता। सभी जेलों मे कैदियों के लिए आवश्यक दवाईयों की आपूर्ति की जाएगी।
उन्होंने कहा अन्य जेलों में बंद कैदियों के साथ ही बीमार कैदियों की विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है। प्रदेश में 102 जेल हैं। आठ केंद्रीय जेेल, 15 जिला जेल, चार उप जेल, दो विशेष जेल, एक ओपन जेल और 70 तहसील स्तरीय जेल हैं। जेलों के अधीक्षक ही अस्पतालों के प्रभारी होते है। अगर कैदियों का इलाज कराने के लिए उन्हें सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराना हो तो इसकी मंजूरी दी गई है। दूसरी तरफ ऐसे कैदी जिनके उपचार के बावजूद ठीक होने की संभावना नहीं है, उन्हें रिहा करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि वे जीवन के अंतिम दिन परिवार के सदस्यों के साथ गुजारा कर सके।

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