
गुरु लिखमीदास की महिमा का गुणगान
मैसूरु. माली समाज धानसाए धनाणी के ग्रामवासियों के तत्वावधान में गुरु लिखमी दास महाराज की स्मृति में 'एक शाम गुरु महाराज लिखमीदास के नाम' भजन संध्या का आयोजन इटकेगुड स्थित राजस्थान विष्णु सेवा ट्रस्ट के भवन में किया गया।
सर्वप्रथम गुरु लिखमीदास महाराज की तस्वीर पर पुष्पहार पहनाकर कर ज्योति प्रज्वलित कर भोग चढ़ा कर विधि विधान से पूजा सम्पन्न कर धर्मसभा का शुभारंभ किया गया। भजन कलाकार जेठू सिंह राठौड़ एवं पार्टी द्वारा गणेश वंदना के साथ राजस्थानी लोक भजनों का सिलसिला शुरू किया। अनेक प्रकार के मधुर भजनों की प्रस्तुति दे कर धर्मसभा को भक्तिमय बना दिया।
भक्तगण भावविभोर हो कर नाचने लगे। इसके बाद माली समाज धानसाए धनाणी ग्रामवासियों द्वारा नागेश्वर महादेव मठ के महंत भोला भारती महाराज व शैतान सिंह चम्पावत धनाणी का पुष्पहार पहनाकर व शाल ओढ़ा कर बहुमान किया गया। भजनों का सिलसिला देर रात तक जारी रहा। प्रसादी का वितरण किया गया। समस्त राजस्थानी समाजों के पदाधिकारीगण व भक्तगण मौजूद रहे।
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परोपकार की भाषा नहीं समझता मनुष्य
मुनि ने पानी और वाणी के उपयोग और उसकी महत्ता को विस्तार से समझाया
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआईटीबी परिसर में अक्षर मुनि ने कहा कि साधु, संतों के मुख से निकला एक एक वचन मुनष्य को तारता है। उन्होंने कहा कि मनुष्य वृक्ष को पत्थर मारता है फिर भी वृक्ष फल ही देता है। वृक्ष एक इन्द्रिय होते हुए भी परोपकार देता है और मनुष्य पंचेन्द्रिय होते हुए भी परोपकार की भाषा नहीं समझता है।
मुनि ने पानी और वाणी के उपयोग और उसकी महत्ता को विस्तार से समझाया। श्रुत मुनि ने कहा कि जिनेश्वर की ओर ले जाने वाली जिनवाणी ही आत्मा के लिए आगम ही एक आईना है। काया, माया और छाया यह छूटने वाली है यह साथ में आने वाली नहीं है पुण्य, प्रेम और प्रभु ही साथ देने वाले हैं।
Published on:
27 Oct 2018, 5:04 PM IST
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