
बांसवाड़ा. विशिष्ठ न्यायालय (लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम) ने गुरुवार को अपने एक निर्णय में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्र्म के जुर्म में आरोपित को बारह साल की सजा और बारह हजार रुपए जुर्माने की सला सुनाई है। नाबालिग का अपहरण एवं दुष्कर्म की वारदात के आरोपी को करीब तीन साल बाद लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम कोर्ट बांसवाड़ा ने गुरुवार को बारह साल की कैद की सजा एवं बारह हजार रुपए जुर्माने से दण्डित करने का आदेश सुनाया। आरोपी करमदिया निवासी मुकेश पुत्र बादरू है। प्रकरण के अनुसार वारदात कुशलगढ़ इलाके में 13 जून 2015 को हुई। एक नाबालिग कुशलगढ़ बाजार में घरेलू सामान खरीदने के लिए घर से निकली थी। वह टिमेड़ा बस स्टेण्ड पर बस का इंतजार कर रही थी तभी बस स्टेण्ड पर करमदिया निवासी मुकेश पुत्र बादरू तथा एक और आरोपित वहां आए। आते ही आरोपितों ने पहले तो नाबालिग को धमकाया।
साथ ही उसे गाड़ी पर बैठाकर बागीदौरा ले आए। वहां पर एक स्टाम्प पर जबरदस्ती नाबालिग के दस्तख्त करवााए और नाबालिग को अपने साथ गुजरात के बड़ौदा लेकर चले गए। वहां ले जाने के बाद मुकेश ने नाबालिग को एक कमरे में बंद कर दिया और उसके साथ हर दिन दुष्कर्म करने लगा। कुछ दिनों बाद जैसे तैसे नाबालिग भागकर आई और अपने घर पहुंंची। इसके बाद परिजनों को पूरी आपबीती बताई। इस वारदात के बाद 22 दिसंबर 2015 को नाबालिग के पिता ने एसीजेएम न्यायालय कुशलगढ़ के समक्ष एक इस्तगासा प्रस्तुत किया, जिस पर प्रकरण दर्ज हुआ। फिर पुलिस ने इस मामले में बयान दर्ज किए और नाबालिग का मेडिकल कराया गया। साथ ही अन्य खानापूर्तियां करने के बाद आरोपित की गिरफ्तारी की।
इन धाराओं में सुनाई सजा
मामले को लेकर विशिष्ट लोक अभियोजन हेमेन्द्रनाथ पुरोहित ने बताया कि प्रकरण की पत्रावलियों का अवलोकन करने एवं तमाम गवाहों के बाद आरोपित मुकेश को न्यायालय ने 12 साल की कैद की सजा व 12 हजार के जुर्माने से दंडित किया है। आरोपी को आईपीसी की धारा 363 में सात वर्ष कैद व 10 हजार जुर्माना, 366 में 10 वर्ष कैद व 10 हजार रुपए जुर्माना, 344 में तीन वर्ष कैद व पांच हजार रुपए जुर्माना, आईपीसी की धारा 376 (2एन) में 12 वर्ष कैद तथा 12 हजार रुपए के जुर्माने से दण्डित करने का आदेश दिया है।
Published on:
20 Apr 2018 01:48 pm
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