
डूंगरपुर . जैन श्वेताम्बर विशा पोरवाड़ संघ के तत्वावधान में चातुर्मास विराजित साध्वी निर्मलगुणा ने मास खमण तपस्वी पूर्णिमा विजय मेहता के पारणा अवसर पर कहा कि मन में उत्तम विचार होने पर ही धर्म आराधना का भाव जागृत होता है और तप उसकी प्रथम सीढ़ी है। उन्होंने कहा कि चातुर्मास का संयोग साधु संतों के ठहराव के साथ धर्म आराधना का पर्व बन जाता है। इससे धर्म प्रेमियों में तप के माध्यम से अपने भाव प्रकट करने की इच्छा बढ़ती है, जिससे मास खमण, 16 उपवास और अट्ठम तप जैसी अनेक आराधनाएं आरंभ होती हैं। शुक्रवार को पूर्णिमा विजय मेहता के व्रत पूर्ण होने पर नेमीनाथ मंदिर से साध्वी संघ के साथ अनुमोदना पालकी निकाली गई। यह पालकी आदर्श नगर लिंक रोड होते हुए तपस्वी के निवास स्थान पर पहुंची। वहां विविध धार्मिक क्रियाएं संपन्न कर तपस्वी का पारणा कराया गया। पालकी के दौरान स्वजन धार्मिक गीतों पर झूमते रहे। इस अवसर पर अन्य समाज जनों ने भी तपस्वी का अभिनंदन किया। इससे पहले रात जागरण के दौरान सकल जैन समाज ने तप का अभिनंदन किया और सभी समाजों ने तपस्वी का सम्मान किया।
Updated on:
01 Sept 2026 02:01 pm
Published on:
29 Aug 2026 06:01 am
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