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त्योहार की खुशियां हुईं काफूर: मासूम की बाल्टी में डूबने से तो बालक की नाले में डूबने से हुई दर्दनाक मौत

बांसवाड़ा जिले में दिल दहला देने वाले दो अलग अलग मामले ( due to drowning ) सामने आए हैं। जिनमें दो मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई है। पहला मामला डूंगरपुर रोड स्थित मंगलम काम्प्लेक्स का है जहां शनिवार देर शाम एक 10 माह की मासूम बच्ची की पानी की बाल्टी में डूबने से मौत ( drowning in bucket ) हो गई।
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बांसवाड़ा

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Abdul Bari

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Updated: 27 Oct 2019, 1:32 AM IST

बांसवाड़ा.
बांसवाड़ा जिले में दिल दहला देने वाले दो अलग अलग मामले ( due to drowning ) सामने आए हैं। जिनमें दो मासूमों की दर्दनाक मौत हो गई है। पहला मामला डूंगरपुर रोड स्थित मंगलम काम्प्लेक्स का है जहां शनिवार देर शाम एक 10 माह की मासूम बच्ची की पानी की बाल्टी में डूबने से मौत ( drowning in bucket ) हो गई।

यह है पूरा मामला ( banswara news )

मंगलम काम्प्लेक्स निवासी समृद्धि पुत्री अजय सोलंकी शाम को खेल रही थी। उसकी मां रसोई में थी। पिता अन्य काम में व्यस्त था। बच्ची खेलते-खेलते पानी की बाल्टी के पास चली गई और उसमें गिर गई, लेकिन घर में किसी को पता नहीं चला। कुछ देर तक बच्ची के न दिखने पर ढूंढना शुरू किया तो उसे पानी से भरी बाल्टी में देख होश उड़ गए। उसे आनन-फानन में बाहर निकाला और परिजन तत्काल लेकर महात्मा गांधी चिकित्सालय पहुंचे, जहां चिकित्सक ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया।

इधर, बच्चे की नाले में डूबने से मौत, तो बच्ची की


दूसरा मामला सल्लोपाट थाना क्षेत्र के तहत गमानिया हमीरा गांव में हुआ। यहां पिता के साथ बैलों को पानी में नहलाने के लिए गए बच्चे की पानी में डूबने से मौत हो गई।


पुलिस ( banswara police ) ने बताया कि गमानिया हमीरा निवासी शंकर गरासिया अपने 12 वर्षीय पुत्र दीपक के साथ दोपहर बाद करीब चार बजे निकट ही नाले में बैलों को नहलाने गया था। नाले में एक गहरा गड्ढा था और बैल अचानक ही उस ओर चला गया। दीपक बैल को वापस लाने गया। बैल तो वापस आ गया, परंतु दीपक गड्ढे में फंस गया। पिता ने उसे निकालने का प्रयास किया, लेकिन असफल होने पर शोर मचाया। आसपास के लोग एकत्रित हो गए और दीपक को पानी से बाहर निकालकर गांगडतलाई अस्पताल ले गए, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।


त्यौहार की खुशियां मातम में बदल गईं

परिजनों के अनुसार दिवाली ( diwali 2019 ) के मौके पर मवेशियों को भी नहलाने की प्रथा है। इसके चलते बैलों को नहलाने के लिए पिता-पुत्र गए थे। दीपक गांव के ही विद्यालय में आठवीं कक्षा में अध्ययनरत था। दोनों ही मामलों में त्यौहार की खुशियां मातम में बदल गईं। ( प्रतीकात्मक तस्वीर )

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