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DILRMP Surveys : बांसवाड़ा जिले के गनोड़ा क्षेत्र में डिजिटल भूमि अभिलेख अद्यतन (डीआइएलआरएमपी) के तहत कराए सर्वे-रिसर्वे में काश्तकारों की जमीन के खसरा नंबर परिवर्तित हो जाने के बाद किसान अपनी उपज सरकारी खरीद केंद्रों पर नहीं बेच पा रहे हैं। सर्वे को लेकर सरकार की ओर से अभी तक कोई समाधान नहीं मिला है। इससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं। दूसरी ओर बाजार में भी किसानों को गेहूं के उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। मजबूरन किसान अब सरकार के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि गनोडा क्षेत्र में डीसीएस पोर्टल पर खसरा नंबरों के मेल न खाने से किसान अपनी उपज का पंजीकरण नहीं कर पा रहे हैं। डिजिटल भूमि अभिलेख अद्यतन (डीआईएलआरएमपी) के सर्वे के चलते पुराने और नए खसरा नंबरों में असमानता हो गई है। यहां तक कि इस सर्वे के बाद कई किसानों की भूमि का क्षेत्रफल घटा-बढ़ा दिया है इसके चलते किसानों की बिक्री की पंजीकरण प्रक्रिया ठप हो गई है। अब किसान सरकारी कार्यालयों पर दर-दर ठोकर खा रहा है।
किसानों ने जमीनों के स्वामित्व, क्षेत्रफल और श्रेणी में भी त्रुटियों के आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार कई खेतों का क्षेत्रफल कम है तो किसी का अधिक दर्ज कर दिया गया है। कई खेतों की वास्तविक स्थिति भी मौके के अनुरूप नहीं है। इससे जमीन की श्रेणी और स्वामित्व को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
साथ ही गेहूं के पैदावार को लेकर भी विवाद हो सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल्दबाजी में हुए इस कार्य में ‘राजस्थान सर्वेक्षण नियमावली भाग-2 (2019)’ का पालन नहीं किया गया है। इसे सरकार को जल्द ठीक करना चाहिए।
किसानों की समस्या को लेकर जिला रसद अधिकारी कार्यालय ने अपने स्तर से एफसीआई प्रबंधक को भी इस बारे में लिखा है और इस मामले में तत्काल कार्रवाई कर किसानों को राहत देने की मांग की है।
विभाग की ओर से कुछ सुझाव भी दिए गए हैं। इनमें पोर्टल पर पुराने और नए खसरा नंबरों को लिंक करने की व्यवस्था विकसित करने, सत्यापन के बाद दोनों खसरा नंबरों के आधार पर बिक्री पंजीकरण की अनुमति देने एवं एफसीआई और राजफेड जैसी एजेंसियों को निर्देशित करने को कहा है, ताकि किसानों को समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने में कोई कठिनाई न हो।
सर्वे के कारण किसानों को हो रही समस्या को लेकर जिला कलक्टर को भी बताया है। उन्होंने भी आगे पत्र लिखा है। अभी किसान सरकार से उम्मीद लगाकर बैठे हैं, ताकि कोई निर्णय हो जाए। इस सर्वे ने किसानों में आपसी विवाद की स्थिति बना दी है। साथ ही सर्वे के आधार पर किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर नहीं बिकेगा। ऐसे में किसानों को व्यापारी के यहां कम दामों में गेहूं बेचना पड़ेगा, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान होगा।
रणछोड़ पाटीदार, प्रांतीय उपाध्यक्ष, भारतीय किसान संघ बांसवाड़ा
Published on:
20 Apr 2026 11:54 am
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