2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बारां में 111 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत पर संकट, अंग्रेजों ने स्थापित कराई थी ग्लास फैक्ट्री, पिछली विंग की जा रही ध्वस्त

Baran News: बारां के कोटा रोड स्थित 111 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत पर अस्तित्व का संकट गहरा गया है। साल 1915 में बनी पूर्व ग्लास फैक्ट्री की पिछली विंग ध्वस्त की जा रही है। शहरवासी भवन को तोड़ने के बजाय संरक्षण और जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं, जबकि मुख्य भवन की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।
2 min read
Google source verification

बारां

image

Arvind Rao

Jul 02, 2026

Baran Heritage Building

Baran Heritage Building (Patrika Photo)

Baran Heritage Building: बारां शहर के कोटा रोड पर स्थित 111 साल पुरानी ऐतिहासिक इमारत आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। स्थापत्य कला और अनूठी वास्तुकला का यह उत्कृष्ट नमूना देखरेख और संरक्षण के अभाव में संकट में है। वर्तमान में इस भवन की पिछली विंग को पूरी तरह ध्वस्त किया जा रहा है, जबकि जानकारों और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि इसे जीर्णोद्धार के जरिए आसानी से बचाया जा सकता था।

अब आशंका जताई जा रही है कि यदि समय रहते मुख्य भवन के संरक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह ऐतिहासिक इमारत सिर्फ कागजों और यादों का हिस्सा बनकर रह जाएगी।

1915 में बनी थी यह ऐतिहासिक ग्लास फैक्ट्री

इतिहास के पन्नों को पलटें तो पता चलता है कि ब्रिटिश काल के दौरान वर्ष 1915 में एक अंग्रेज अधिकारी ने यहां कांच के सामान के निर्माण के लिए एक भव्य 'कांचघर' (ग्लास फैक्टरी) स्थापित कराई थी। कुछ समय बाद यह फैक्टरी बंद हो गई। देश की आजादी के बाद, 1950 के दशक में इस विशाल और खूबसूरत भवन की उपयोगिता को देखते हुए इसमें एक सरकारी विद्यालय शुरू किया गया। वर्तमान में भी यहां राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय (सीनियर सेकेंडरी स्कूल) का सफल संचालन हो रहा है।

स्थापत्य कला और वास्तुकला का अनूठा उदाहरण

यह इमारत अपने महलनुमा स्वरूप, नक्काशीदार जालियों, विशाल मेहराबों पर टिकी छतों और खंभों पर आधारित विशिष्ट संरचना के लिए बारां शहर की एक अलग पहचान रही है। भवन की भव्यता का अंदाजा इसके आगे और पीछे बने बड़े-बड़े कमरों और एक विशाल गोलाकार सभागार से लगाया जा सकता है। इस इमारत की सबसे खास बात यह है कि इसकी दोनों विंग्स को आपस में जोड़ने के लिए एक पुलनुमा मार्ग बनाया गया है, जो इसकी ऐतिहासिक और तकनीकी बनावट को बेहद खास बनाता है।

एक हिस्सा गिरा तो पूरी विंग पर गाज गिर रही

पिछले वर्ष जुलाई महीने में हुई भारी बारिश के कारण इस ऐतिहासिक भवन की पिछली विंग का एक छोटा सा हिस्सा ढह गया था। इसके बाद प्रशासन द्वारा तकनीकी जांच कराई गई। प्रारंभिक रिपोर्ट में तो पूरे ही भवन को ध्वस्त करने की सिफारिश कर दी गई थी, लेकिन स्कूल प्रशासन की सजगता के चलते दोबारा सर्वे कराने का आग्रह किया गया।

पुनः सर्वे में भी पिछली विंग को असुरक्षित माना गया और अब उसे हटाने की सिफारिश के बाद पूरी पिछली विंग को ही ध्वस्त किया जा रहा है। गौरतलब है कि इस पीछे की विंग में पहले स्कूल की महत्वपूर्ण कक्षाएं, समृद्ध पुस्तकालय और आधुनिक प्रयोगशालाएं संचालित होती थीं।

जीर्णोद्धार के प्रस्ताव भी नहीं हुआ स्वीकृत

स्कूल प्रशासन ने इस धरोहर को बचाने के लिए पूर्व में कई बार बजट और जीर्णोद्धार के प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजे थे। बाद में मुख्य विंग की मरम्मत के लिए भी विशेष योजना भेजी गई, लेकिन प्रशासनिक ढिलाई के चलते अब तक कोई बजट या स्वीकृति नहीं मिली। स्कूल सूत्रों के मुताबिक, मुख्य भवन के कई हिस्सों की स्थिति लगातार कमजोर हो रही है। एहतियात के तौर पर इसके मुख्य सभागार को पूरी तरह बंद कर दिया गया है।

बारां के शहरवासियों और जागरुक नागरिकों का कहना है कि यह इमारत शहर की अनमोल ऐतिहासिक धरोहर और पहचान है। इसे मलबे में तब्दील करने के बजाय आधुनिक तकनीकों से इसका संरक्षण किया जाना चाहिए, ताकि भावी पीढ़ियां अपनी संस्कृति और इतिहास से रूबरू हो सकें।

पिछले वर्ष बारिश के दौरान पीछे की विंग का एक हिस्सा गिर गया था। उच्चाधिकारियों से प्राप्त निर्देशों और सुरक्षा मानकों के अनुसार ही अब पिछली असुरक्षित विंग को हटाने का कार्य शुरू करा दिया गया है।
-राधेश्याम मीणा, दीक्षित, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कोटा रोड, बारां