![प्रदेश में सबसे ज्यादा लहसुन की पैदावार हाड़ौती [कोटा संभाग] में है। पिछले दो साल से अच्छे भाव मिलने के कारण लहसुन उत्पादक किसान खुश है। यही कारण है कि कृषि विभाग इस साल रबी के सीजन में लहसुन के रकबे में करीब 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। इस बार लहसुन का औसत भाव 12 हजार से 25 हजार रुपए ङ्क्षक्वटल के बीच रहा है।](https://cms.patrika.com/wp-content/uploads/2024/06/28062024baran19_1.jpg?w=800)
प्रदेश में सबसे ज्यादा लहसुन की पैदावार हाड़ौती [कोटा संभाग] में है। पिछले दो साल से अच्छे भाव मिलने के कारण लहसुन उत्पादक किसान खुश है। यही कारण है कि कृषि विभाग इस साल रबी के सीजन में लहसुन के रकबे में करीब 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। इस बार लहसुन का औसत भाव 12 हजार से 25 हजार रुपए ङ्क्षक्वटल के बीच रहा है।
मंडी में अच्छे भाव से उम्मीदें जगी, हाड़ौती की प्रमुख नकदी फसल है लहसुन
कोटा/बारां. प्रदेश में सबसे ज्यादा लहसुन की पैदावार हाड़ौती [कोटा संभाग] में है। पिछले दो साल से अच्छे भाव मिलने के कारण लहसुन उत्पादक किसान खुश है। यही कारण है कि कृषि विभाग इस साल रबी के सीजन में लहसुन के रकबे में करीब 37 हजार हैक्टेयर क्षेत्र की वृद्धि की उम्मीद कर रहा है। इस बार लहसुन का औसत भाव 12 हजार से 25 हजार रुपए ङ्क्षक्वटल के बीच रहा है।
संभाग के चारों जिलों कोटा, बूंदी, बारां और झालावाड़ में लहसुन की खूब पैदावार है। यहां पिछले सीजन में 51 हजार 448 हैक्टेयर में लहसुन बोई गई थी। इसमें करीब 2 लाख 96 हजार 278 मीट्रिक टन का उत्पादन रहा। भावों को देखते हुए इस वर्ष यह रकबा वह वर्ष बढकऱ 88 हजार 207 हैक्टेयर क्षेत्र होने की उम्मीद है। लहसुन के उत्पादन का अनुमान 5 लाख 90 हजार 906 मीट्रिक टन आंका जा रहा है। देश में सबसे ज्यादा लहसुन मध्यप्रदेश में होता है, इसके बाद राजस्थान का नम्बर है।
दो साल भावों ने रुलाया
यूं तो मांग के चलते हर साल किसानों को लहसुन के अच्छे भाव मिल जाते है, लेकिन लेकिन वर्ष 2020-21 और 2021-22 में इसके भावों में भारी गिरावट रही। वर्ष 2021-22 में भाव सबसे निचले स्तर पर रहे थे। इस कारण अगले सीजन में रकबा कम हो गया था।
इस बार 25000 पार
इस बार हाड़ौती की मंडियों में लहसुन के भाव 25 हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल तक रहे। औसत भाव 12 से 16 हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल पर स्थिर रहे। जानकारों के अनुसार इस साल मध्यप्रदेश में 33 हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल तक लहसुन बिका।
यूं बिगड़ता है गणित
लहसुन के भावों में उतार चढ़ाव में मांग और आपूर्ति के अनुपात के अलावा विदेशों से चोरी छिपे आने वाला लहसुन भी है। जानकारों के अनुसार जब देश में बड़ी मात्रा में विदेशी लहसुन आ जाता है तो उसके भाव बहुत कम हो जाते है। देश में चीन और अफगानिस्तान से चोरी छिपे लहुसन आता है। भावों पर नियंत्रण के लिए केन्द्र ने लहसुन के आयात पर 200 प्रतिशत शुल्क लगा रखा है।
भाव से चेहरे खिले
लहसुन उत्पादक किसानों की उम्मीदो को वर्ष 2022-23 में पंख लग गए थे। इस वर्ष लहसुन के भावों में ऐतिहासिक उछाल आया। इस साल अच्छी गुणवत्ता वाला लहसुन 51 हजार रुपए प्रति ङ्क्षक्वटल तक के उच्च स्तर के भाव पर बिका। हालांकि औसत भाव 21 से 32 हजार प्रति ङ्क्षक्वटल रहा।
लहसुन उत्पादों की मांग
यूं तो देश से लहसुन बांग्लादेश में निर्यात होता है, लेकिन अन्य देशों जैसे मध्यपूर्व के देशों यूएई, ईरान आदि में इसके पेस्ट, पाउडर और फ्लैक्स की मांग होती है।
संभाग में इस वर्ष इतना हुआ उत्पादन
जिला रकबा उत्पादन
कोटा 11909 80981
बारां 22631 161131
झालावाड़ 15676 94056
बूंदी 2032 5110
2024-25 में संभावित रकबा
कोटा 21800
बारां 31211
झालावाड़ 33032
बूंदी 2164
हाड़ौती संभाग में फसल वर्ष 2024-25 में लहसुन का रकबा गत वर्ष की तुलना में भारी स्तर पर बढऩे की उम्मीद है। इस वर्ष करीब 36 हजार 759 हैक्टेयर में अधिक बुवाई होना संभावित है। हालांकि लहसुन की फ सल में अधिक पानी की जरूरत पड़ती है।
डॉ.पी.के., संयुक्त निदेशक, उद्यान विभाग कोटा
Published on:
29 Jun 2024 11:14 am
बड़ी खबरें
View Allबारां
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
