
फोटो: पत्रिका
Rajasthan News: बारां जिले में रबी की प्रमुख फसल गेहूं की बुवाई अभी जारी है। जो कि 15 दिसम्बर तक होगी। धान वाले खेतों में तथा जिन खेतो में बरसात के पानी का भराव अधिक रहा उन खेतों में गेहूं की बुवाई देरी से हो पा रही है।
गत वर्ष गेहूं का रकबा 1 लाख 46 हजार हैक्टेयर में था। इस वर्ष गेहूं की बुवाई का लक्ष्य 1 लाख 70 हजार हेक्टेयर निर्धारित किया गया है। लेकिन इस बार मौसम की प्रतिकूलता के चलते दोबारा फिर से हुई बाद की बरसात से सरसों की की बुवाई लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाई। इसके चलते किसानों को गेहूं की बुवाई करना ही पड़ेगा। इस कारण गेहूं का रकबा 2 लाख हैक्टेयर तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है।
बारां जिले में चना प्रमुख रबी फसल है और इस वर्ष किसानों की पहली पसंद बनी हुई है। कई गांवों—अटरू, छबड़ा, छीपाबड़ौद, शाहाबाद और मांगरोल में चना की बुवाई तेज़ी से जारी है। किसानों का कहना है कि इस बार मिट्टी की नमी और मौसम दोनों चना की फसल के लिए अनुकूल हैं। बाज़ार में चना के अच्छे भाव और एमएसपी पर खरीद की उम्मीद ने भी किसानों का उत्साह बढ़ाया है।
गेहूं की बुवाई भी जिले में तेजी से हो रही है। सिंचाई सुविधाओं वाले क्षेत्रों में गेहूं की शुरुआती बढ़वार अच्छी बताई जा रही है। हालांकि बारां में सरसों का रकबा तुलनात्मक रूप से गेहूं और चने से कम है, फिर भी जहां-जहां सरसों बोई गई है, वहां फसल की शुरुआती स्थिति मजबूत है। कई किसानों ने बताया कि रोगों का प्रकोप अभी तक न्यूनतम है। बारां जिले में रबी सीज़न की शुरुआत मजबूत रही है। यदि मौसम स्थिर रहता है और किसी प्रकार का रोग-कीट प्रकोप नहीं बढ़ता, तो जिले में गेहूंऔर चना उत्पादन इस वर्ष बेहतर रहने की संभावना है।
बारां और छबड़ा मंडियों में रबी फसलों के भाव पिछले दो हफ्तों से स्थिर और मजबूत बने हुए हैं। चना 6,400 से 7,000 रुपए प्रति क्विंटल, गेहूं 2,150 से 2,300 रुपए प्रति क्विंटल और सरसों 5,200 से 5,600 रुपए प्रति क्विंटल के भाव चल रही है। किसानों का कहना है कि यदि ऐसे ही भाव बने रहे तो इस साल लाभ अच्छा रहेगा।
परवन, पार्वती और कैलाश बडोदा डैम में पर्याप्त पानी होने से सिंचाई को लेकर किसान निश्चिंत हैं। कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि दिसंबर-जनवरी में तापमान सामान्य रहता है, तो जिले में चना और गेहूं की उपज पिछले वर्ष से 5-10त्न अधिक हो सकती है।
जिला कृषि विभाग किसानों को निर्देश दे रहा है कि चना में प्रारंभिक अवस्थाओं में कीट-रोग का निरीक्षण करते रहें। गेहूं में समय पर पहली सिंचाई करें। सरसों में माहू और तना बेधक कीट से सावधानी बरतें। जिला कृषि विभाग के अधिकारी किसानों को उचित उर्वरक प्रबंधन, कीट नियंत्रण और समय पर सिंचाई को लेकर सलाह जारी कर रहे हैं। विशेष रूप से चना फसल में किडनी बीटिल और फ्यूजेरियम विल्ट से बचाव के निर्देश दिए जा रहे हैं।
बारां जिले में रबी सीज़न 2024-25 का रुझान अब तक बेहद सकारात्मक है। किसानों का मनोबल ऊंचा है, मौसम अनुकूल है, और मंडियों में भाव भी अच्छे बने हुए हैं। यदि मौसम इसी तरह बना रहा तो बारां इस वर्ष रबी उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज कर सकता है।
इस बार मानसून अच्छा रहा, खेतों में नमी भरपूर थी। चना जल्दी निकल रहा है। अगर ठंड समय से रहे तो पैदावार बढ़िया होगी।
रामप्रसाद मीना, अटरू क्षेत्र के किसान
गेहूं की बुवाई भी अच्छी चल रही है। पानी की कमी नहीं है, और बाज़ार में दाम भी मजबूत हैं। जितनी लागत लग रही है, उससे बेहतर भाव मिलने की उम्मीद है।
गिरधारीलाल गुर्जर, छबड़ा के किसान
जहां सरसों बोई है, वहां फसल की बढ़वार तेज़ है। अभी तक कोई रोग नहीं लगा है। उम्मीद है कि उपज अच्छी रहेगी।
सुषमा बाई, मांगरोल की महिला किसान
जिले में इस वर्ष रबी का सीजन शुरुआत के साथ आगे बढ़ रहा है। जिले के अटरू, छबड़ा, मांगरोल, शाहबाद और छीपाबड़ौद क्षेत्रों में बुवाई तेजी से पूरी हो रही है। शुरुआती फसल स्थिति बेहतर है और किसान मौसम तथा बाज़ार दोनों से उत्साहित दिखाई दे रहे हैं।
Published on:
26 Nov 2025 03:31 pm
