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बरेली हिंसा से जुड़ा पूरा मामला क्या है? कौन हैं मौलाना तौकीर रजा जिनकी जमानत याचिका हाईकोर्ट ने की खारिज

Bareilly Violence Maulana Tauqeer Raza: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा मामले में मौलाना तौकीर रजा खान और डॉ. नफीस की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने अन्य आरोपियों को जमानत दे दी।
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बरेली

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Harshul Mehra

•

Updated: 7 Sep 2026, 6:38 PM IST

Maulana Tauqeer Raja

मौलाना तौकीर रजा (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Bareilly Violence Maulana Tauqeer Raza: बरेली हिंसा मामले में इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल के प्रमुख मौलाना तौकीर रजा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने हिंसा मामले में तौकीर रजा की जमानत याचिका खारिज कर दी है। उनके साथ आरोपी बनाए गए डॉ. नफीस को भी अदालत से राहत नहीं मिली है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली हिंसा से जुड़ी कुल 63 जमानत याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुनाया। अदालत ने मौलाना तौकीर रजा और डॉ. नफीस को छोड़कर अन्य सभी आरोपियों को जमानत दे दी है। मामले में यह आदेश जस्टिस आशुतोष श्रीवास्तव की सिंगल बेंच ने जारी किया।

26 मई को पूरी हुई थी सभी पक्षों की बहस

मामले में सभी पक्षों की दलीलें 26 मई को पूरी हो गई थीं, जिसके बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। मौलाना तौकीर रजा समेत हिंसा के अन्य आरोपियों ने जेल से बाहर आने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत याचिकाएं दाखिल की थीं। हाईकोर्ट ने इन सभी याचिकाओं को एक साथ लेकर सुनवाई की। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तौकीर रजा और डॉ. नफीस की जमानत अर्जी खारिज कर दी, जबकि बाकी आरोपियों को राहत प्रदान की।

बरेली हिंसा से जुड़ा पूरा मामला?

दरअसल, बरेली में 26 सितंबर 2025 को हिंसा भड़क गई थी। इस मामले में मौलाना तौकीर रजा खान को पुलिस की ओर से हिंसा का कथित मास्टरमाइंड बताया गया था। घटना के बाद तौकीर रजा समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के बाद आरोपियों ने जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। पुलिस ने हिंसा के मामले में अलग-अलग थानों में करीब 10 FIR दर्ज की थीं। बरेली हिंसा के दौरान 2 कॉन्स्टेबल घायल हुए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, कॉन्स्टेबल सिद्धांत चौधरी को गंभीर चोट आई थी। बताया गया कि गोली उनके बाएं हाथ को छूकर निकल गई थी, जिससे उनकी यूनिफॉर्म भी जल गई थी। वहीं, कॉन्स्टेबल आदित्य प्रताप सिंह भी घायल हुए थे।

घटनास्थल से मिले थे कारतूस, पत्थर और एसिड से भरी बोतलों के टुकड़े

पुलिस ने हिंसा के बाद घटनास्थल से कई अहम सबूत बरामद किए थे। इनमें 12-बोर कारतूस के दो खाली खोल, एसिड से भरी टूटी कांच की बोतलों के टुकड़े और बड़ी संख्या में ईंट-पत्थर शामिल थे। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था। FIR में दंगा, हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर आरोपों से जुड़ी धाराएं शामिल की गई थीं।

कोतवाली थाने की FIR में तौकीर रजा ने मांगी थी जमानत

मौलाना तौकीर रजा खान के खिलाफ कोतवाली थाने में दर्ज FIR के मामले में जमानत याचिका दाखिल की गई थी। इसी याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने मामले से जुड़ी अन्य जमानत याचिकाओं के साथ तौकीर रजा की याचिका पर भी सुनवाई की। हालांकि, हाईकोर्ट ने उन्हें फिलहाल जमानत देने से इनकार कर दिया।

कौन हैं मौलाना तौकीर रजा खान?

मौलाना तौकीर रजा खान बरेली के प्रमुख धार्मिक नेताओं में शामिल हैं। वह इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के प्रमुख हैं और बरेली के प्रसिद्ध आला हजरत खानदान से ताल्लुक रखते हैं। तौकीर रजा के परिवार का संबंध सुन्नी बरेलवी मसलक की धार्मिक परंपरा से रहा है। उन्होंने साल 2001 में राजनीति में कदम रखा और अपनी राजनीतिक पार्टी बनाई। इसके बाद 2009 में वह कांग्रेस के साथ आए। 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने समाजवादी पार्टी का समर्थन किया था। हालांकि, 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के बाद तौकीर रजा और समाजवादी पार्टी के बीच राजनीतिक दूरी बढ़ गई। 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने बहुजन समाज पार्टी (BSP) का समर्थन किया था।

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