22 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

कौन हैं ये डीएम, जिन्होंने तोड़ी वो परंपरा, जिसका पीएम-सीएम भी रखते हैं ख्याल

Jageshwar Dham Controversy Update: जानिए, उस DM के बारे में जिन्होंने उस परंपरा को तोड़ दिया जिसका पीएम-सीएम भी ख्याल रखते हैं। पूरा मामला क्या है?

4 min read
Google source verification
know about ias avinash singh his gunman entered jageshwar dham with weapon bareilly

मंदिर के गर्भगृह में हथियार के साथ प्रवेश, उठे सवाल। फोटो सोर्स- Video Grab

Jageshwar Dham Controversy Update: उत्तराखंड के अल्मोड़ा स्थित प्रसिद्ध जागेश्वर धाम में सोमवार को एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने धार्मिक मर्यादाओं और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी। उत्तर प्रदेश के बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह अपने गनर के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश कर गए। इस दौरान उनका सुरक्षाकर्मी कार्बाइन जैसे हथियार के साथ अंदर मौजूद रहा, जिससे विवाद खड़ा हो गया।

नवग्रह पूजा के दौरान हुआ घटनाक्रम

बताया जा रहा है कि DM अविनाश सिंह मंदिर में नवग्रह पूजा कर रहे थे। पूजा के दौरान उनका गनर भी उनके साथ गर्भगृह में मौजूद रहा। जैसे ही पुजारियों और अन्य लोगों की नजर गनर के हथियार पर पड़ी, उन्होंने तुरंत इसका विरोध किया। पुजारियों का कहना है कि गर्भगृह मंदिर का सबसे पवित्र स्थान होता है, जहां किसी भी प्रकार के हथियार का प्रवेश पूरी तरह वर्जित है।

पुजारियों ने जताई कड़ी आपत्ति

मंदिर के पुजारी नवीन चंद्र भट्ट, मनोज भट्ट और अन्य पुजारियों ने इस घटना को धार्मिक परंपराओं और आस्था के खिलाफ बताया। उनका कहना है कि अब तक देश के शीर्ष नेता, यहां तक कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री भी जब दर्शन के लिए आए, तब उनकी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद गर्भगृह के भीतर हथियार नहीं ले जाए गए। ऐसे में इस तरह की घटना मंदिर की पवित्रता पर सवाल खड़े करती है।

सुरक्षा कर्मियों का पक्ष: प्रोटोकॉल का पालन

वहीं, सुरक्षा कर्मियों का कहना है कि यह पूरी तरह से प्रोटोकॉल का हिस्सा था। VIP सुरक्षा के तहत गनर का हर समय साथ रहना जरूरी होता है, इसलिए वह हथियार के साथ गर्भगृह तक पहुंच गया। हालांकि, इस तर्क को स्थानीय लोग और पुजारी स्वीकार करने को तैयार नहीं हैं।

स्थानीय लोगों में आक्रोश, बढ़ा विवाद

इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की मर्यादा और परंपराओं का सम्मान हर हाल में होना चाहिए, चाहे व्यक्ति कितना भी बड़ा अधिकारी क्यों न हो। घटना के बाद मंदिर परिसर में चर्चा और विरोध का माहौल बन गया।

चेतावनी बोर्ड लगाने की पहल शुरू

विवाद बढ़ने के बाद प्रशासन हरकत में आया है। अब मंदिर परिसर के बाहर हथियारों के प्रवेश को लेकर स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने भी इस संबंध में नोटिस जारी कर दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने।

मंदिर प्रबंधन ने दोहराई परंपराओं की अहमियत

मंदिर प्रबंधन और पुजारियों ने स्पष्ट किया है कि जागेश्वर धाम की प्राचीन परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और सभी श्रद्धालुओं व अधिकारियों के लिए समान नियम लागू किए जाएं।

जांच के आदेश, मामले को शांत करने की कोशिश

प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि घटना के सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उचित कार्रवाई की जाएगी, ताकि धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे और भविष्य में इस तरह के विवाद से बचा जा सके।

कौन हैं IAS अविनाश सिंह

बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह वर्ष 2014 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी हैं। उनका मूल निवास उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में है। प्रशासनिक सेवा में आने के बाद उन्होंने विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी जिम्मेदारियां निभाई हैं और अपने कार्यकाल के दौरान कई जिलों में प्रशासनिक अनुभव हासिल किया है।

अपने करियर की शुरुआत में अविनाश सिंह ने गोरखपुर में नगर आयुक्त के रूप में कार्य किया, जहां उन्होंने शहरी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने और विकास कार्यों को गति देने में अहम भूमिका निभाई। इसके बाद उन्हें मिर्जापुर में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के पद पर तैनात किया गया, जहां उन्होंने ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और प्रशासनिक समन्वय में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

साल 2023 में उन्हें पहली बार किसी जिले की कमान सौंपी गई और अंबेडकर नगर के जिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विशेष ध्यान दिया। बाद में वर्ष 2025 में उनका तबादला बरेली जिले में कर दिया गया। तब से वे बरेली के जिलाधिकारी के पद पर कार्यरत हैं और जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को संभाल रहे हैं।

मामले को लेकर क्या बोले अविनाश सिंह

जागेश्वर धाम में हुए इस पूरे विवाद पर बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। उन्होंने मामले को लेकर सफाई देते हुए कहा कि उनके गनर का गर्भगृह में हथियार के साथ प्रवेश करना जानबूझकर नहीं था, बल्कि यह एक अनजाने में हुई गलती हो सकती है।

डीएम अविनाश सिंह के मुताबिक, पूजा के दौरान बीच में पानी की आवश्यकता पड़ी थी। संभवतः उसी दौरान उनका गनर पानी देने के लिए अंदर आ गया और उसके पास मौजूद कार्बाइन भी साथ चली गई। उन्होंने कहा कि यह घटना पूरी तरह से अनजाने में हुई और इसमें किसी प्रकार की मंशा नहीं थी।

अविनाश सिंह ने यह भी बताया कि वह व्यक्तिगत कारणों से जागेश्वर धाम पहुंचे थे। उनके पिता का इसी वर्ष जनवरी में निधन हो गया था, जिसके बाद वे धार्मिक अनुष्ठान और हवन-पूजन कराने के लिए अपनी पत्नी के साथ मंदिर गए थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह मंदिर की परंपराओं और धार्मिक मर्यादाओं से भली-भांति परिचित हैं और उनका पूरा सम्मान करते हैं। उन्होंने दोहराया कि इस घटना को किसी तरह की जानबूझकर की गई कार्रवाई के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे एक भूल के तौर पर समझा जाना चाहिए।