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जागरूकता से ही रोका जा सकता है एड्स

-थार में बढ़ता एड्स-एचआइवी का रोग-हर साल मरीजों की संख्या में इजाफा-लाइलाज है मर्ज, जीवन भर रहता है साथ-एड्स दिवस विशेष
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बाड़मेर

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Mahendra Trivedi

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Updated: 1 Dec 2021, 9:05 PM IST

जागरूकता से ही रोका जा सकता है एड्स

जागरूकता से ही रोका जा सकता है एड्स

बाड़मेर. जागरूकता और शिक्षा की कमी के कारण ही एचआइवी-एड्स का रोग बढ़ता जा रहा है। इसका खात्मा करने के लिए देशों में काम किया जा रहा है। लेकिन शिक्षा और असमानताओं के कारण यह मर्ज शहरों के साथ गांवों तक पहुंच चुका है और लगातार बढ़ता जा रहा है। विश्व एड्स दिवस मनाने का उद्देश्य है इसे लेकर लोगों को जागरूक किया जाए। यही एकमात्र तरीका ही इससे बचाव है।
बाड़मेर में भी एड्स के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अशिक्षा और जागरूकता की कमी इसमें बड़ा कारण बनी है। एड्स के मामलों में देखा जाए तो यह 40 साल के लोगों में ही ज्यादा मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि पुरुषों की संख्या महिलाओं से कुछ अधिक है। बाड़मेर में यह सामने आया है कि यहां पर औसतन प्रतिवर्ष 100 नए एचआइवी-एड्स मरीज मिल रहे हैं।
हर महीने बढ़ रहे है नए रोगी
बाड़मेर जिले में एचआइवी-एड्स के नए रोगी हर महीने बढ़ते जा रहे हैं। चिकित्सा विभाग के एआरटी सेंटर से दवा लेने वाले रोगियों की संख्या में हर साल बढ़ोतरी हो रही है जो चिंता का विषय है। इनमें सभी उम्र और पुरुष व महिला दोनों शामिल है। सेंटर में औसतन प्रति माह 10-15 नए रोगी जुड़ रहे हैं। वर्तमान में जिले में कुल 1420 से अधिक मरीज यहां से नियमित रूप से दवाएं ले रहे हैं।
बढऩे के यह भी है बड़े कारण
दूसरों शहरों में रहने और अनजान लोगों से शारीरिक संपर्क में आने के दौरान एचआइवी होने की आशंका रहती है। ऐसे कई मामलों में सामने भी आया है कि अन्य प्रदेश में रहने के दौरान बीमार हुआ व्यक्ति स्वस्थ नहीं हुआ और बाद में जब जांच करवाई गई तो एचआइवी-एड्स की पुष्टि हुई। अब यह खतरा और बढ़ गया है। बाड़मेर शहर और अन्य कई स्थानों पर स्पा की आड़ में वैश्यावृत्ति का धंधा पनप रहा है। हाइवे पर कतारों में मसाज पार्लर और स्पा सेंटर खुल चुके हैं। कई होटलों में भी स्पा का संचालन किया जा रहा है। यहां पर अवैध तरीके से जिस्मफरोशी का धंधा भी चोरी-चुपके चलाया जा रहा है। यह भी एचआइवी-एड्स का एक बड़ा कारण है।
वायरस कोशिकाओं को करता है नष्ट
विशेषज्ञ बताते हैं कि ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (एचआईवी) एक ऐसा वायरस है जो मानव शरीर की कोशिकाओं को नष्ट करता है, जो शरीर को इंफेक्शन से लडऩे में मदद करती है। यह ऐसी स्थिति है जो तब आती है जब इम्यून सिस्टम पूरी तरह से काम करना बंद कर देता है। आमतौर पर यह असुरक्षित यौन संबंध, एचआईवी ग्रसित व्यक्ति के संपर्क में आने और इंजेक्शन या उपकरण को साझा करने से हो सकता है। मानव शरीर एचआईवी से छुटकारा नहीं पा सकता। अभी दुनिया में एचआईवी का कोई प्रभावी इलाज मौजूद नहीं है। इसलिए, एक बार एचआईवी हो जाने के बाद, यह जीवन भर आपके साथ रह सकता है।
इसलिए मनाया जाता है विश्व एड्स दिवस
साल 1988 के 1 दिसम्बर से शुरू हुए विश्व एड्स दिवस का उद्देश्य एचआईवी या एड्स से पीडि़तों की मदद को धन जुटाना, एड्स को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने, एड्स या एचआईवी रोगियों के प्रति होने वाले भेदभाव को रोकना और एड्स से जुड़े मिथ को दूर करते हुए आमजन को शिक्षित करना भी है। साल 2021 की थीम 'असमानताओं को समाप्त करें, एड्स का अंत करेंÓ रखी गई है।