
bad Condition of people living in western border area in fierce heat
भीखभारती गोस्वामी @पश्चिमी सीमा से .48 से 50 डिग्री तापमान। आसमान आग उगल रहा है। लू के थपेड़े अग्नि की लपटें। जमीन तवे की तरह तपी है। बालू रेत का कण-कण तपकर लालबूंद। भीषणगर्मी की तपती दुपहरी में सीमावर्ती गांवों के महिला पुरुष दो-दो घडे़ सिर पर उठाए चलते हैं तो पसीने से पूरे लथपथ और चेहरे से एेसे पसीने की बूंदे टपकती है कि जैसे नहा गए हों। उस पर भीषणगर्मी से चेहरा लाल और हांफती सांसें। एक घड़े पानी के लिए तीन से चार मील पैदल चलते इन महिला-पुरुषों को देखकर आंखों में पानी आ जाए।
रेगिस्तान के सीमावर्ती इलाके में बॉर्डर विकास पर करोड़ों रुपए खर्च हुए है लेकिन पानी की स्थिति 200 से अधिक गांवों में जस की तस है। सरकारी योजनाएं जवाब दे रही है औैर प्रशासनिक अधिकारी कोई जवाब नहीं देते। नहरी पानी 2018 में आने का दावा किया था और अब 2021 का सपना दिखा रहे हैं। एेसे में सीमावर्ती लोग प्रतिदिन पानी के लिए जंग लड़ रहे हंै।
इन गांवों में हाल बेहाल
सीमावर्ती क्षेत्र के शहदाद का पार खुर्द, बाड़मेरों का पार, गड़स, मायाणी, रासलाणी, हापिया, सिरगुवाला, दुठोड़, पनीया, खंगाराणी, बूलाणी, थानाणी, बिजावल, द्राभा, खबडाला, रतरेड़ी कला सहित कई ग्राम पंचायतों के बाशिंदे पानी सहित मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं।
तीन मील चलता हूं
तीन मील दूर ढाणी है। रोज यहां बेरी पर आता हूं। यहां से पानी लेकर घर जाना होता है। परिवार का एक सदस्य पानी लाने का ही काम करता है।- खमीशा खां
कोई नहीं सुनता
अफसरों और नेताओं को मालूम नहीं है क्या? मीटिंगे तो हर सात दिन में होती है। सब जानते हैं। समाधान कोई नहीं करवा रहा है। इनके पीछे घूमेंगे तो दूसरे दिन चार घड़े ज्यादा पानी लाना होगा।- खेताराम बोसिया
अभी प्रयास कर रहे हैं
पानी की समस्या का समाधान तो नहरी पानी आने पर ही होगा। 2021 तक योजना पूरी होनी है। अभी प्रयास कर रहे हैं।- हेमंत चौधरी, अधीक्षण अभियंता जलदाय विभाग बाड़मेर
Published on:
31 May 2018 07:59 am
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