
बाड़मेर-बालोतरा जिलों का पुनर्सीमांकन (फोटो- पत्रिका)
Barmer-Balotra District Reorganization: बाड़मेर और बालोतरा दोनों जिलों का पुनर्सीमांकन कड़कड़ाती सर्दी में राजनीतिक गर्मी को उबाल पर ले आया है। सरहद पर हद पार चर्चाओं का बाजार गर्म है।
फैसले के पक्षधर इसे पूर्व में लिए गए निर्णय को फिर से हद में लाने की कवायद बता रहे हैं तो विपक्ष में खड़े लोग कह रहे हैं कि सत्ता वालों ने हद कर दी है। धोरीमन्ना-गुड़ामालानी के बालोतरा में जाने से नाराज हुए लोग दूरी और बाड़मेर से जुड़ाव दो तर्क देकर इसका विरोध कर रहे हैं तो दूसरा पक्ष रिफाइनरी के साथ जुड़ने को अपना विकास मानते हुए संतोष में हैं।
प्रदेश में एकमात्र बालोतरा और बाड़मेर जिले का पुनर्सीमांकन शुक्रवार को हुआ। इसमें कांग्रेस सरकार के समय में तय किए गए क्षेत्र को बदल दिया गया है। नए बदलाव ने एकबार फिर न केवल राजनीति क्षेत्र बल्कि प्रभावित क्षेत्र के लोगों को नए सिरे से प्राथमिकताएं तय करने की स्थिति पर लाकर खड़ा किया है।
बालोतरा की भाजपा में अब नई राजनीति होगी। अब तक यहां मुख्यालय की राजनीति में पचपदरा विधायक अरूण चौधरी कर रहे थे। लेकिन अब केके विश्नोई के आने से बालोतरा में बड़े नेता केके विश्नोई हो जाएंगे। धोरीमन्ना, गुड़ामालानी और सिणधरी का राजनीतिक वर्चस्व दखल करेगा। बायतु की राजनीति से अलग यह गणित होगा।
उधर, कांग्रेस में भी बायतु का हिस्सा बाड़मेर में भी होने से फिलहाल बायतु विधायक बाड़मेर-बायतु दोनों में सक्रिय रहेंगे और बाद में पचपदरा के मदन प्रजापत के साथ बालोतरा गृह जिले से सांसद उम्मेदाराम, जिला प्रमुख महेंद्र चौधरी की नई राजनीति विधानसभा में होगी।
विधायक गुड़ामालानी एवं राज्यमंत्री विश्नोई ने गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को भी बालोतरा से जुड़वा दिया है। बालोतरा से जोड़ने से केके विश्नोई का राजनीतिक वर्चस्व उनके पक्ष में बढ़ा है। रिफाइनरी से रोजगार के अवसर के साथ ही वे अपनी राजनीतिक पृष्ठभूमि को मजबूत करने में कामयाब रहे हैं।
पूर्व विधायक एवं मंत्री हेमाराम चौधरी चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके हैं। लेकिन उनकी पुत्री सुनीता चौधरी के राजनीति में यहां से आगे आने के भरसक प्रयास में थी। धोरीमन्ना-गुड़ामालानी को बाड़मेर से अलग करने का निर्णय उनके लिए ठीक नहीं है। विधानसभा क्षेत्र के परिसीमन में अब क्या होगा, इसका इंतजार रहेगा।
कांग्रेस का राष्ट्रीय चेहरा बन चुके हरीश चौधरी हमेशा विपक्ष के टारगेट पर रहते हैं। बायतु विधानसभा के दो हिस्से होने से उनके लिए मजबूत माना जाने वाला इलाका पाटोदी व गिड़ा अब बालोतरा जिले में होगा और बायतु बाड़मेर में। जिले अलग होने के बाद दूसरा कदम विधानसभा का होगा।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि बायतु विधानसभा को खत्म कर दिया जाएगा और नई विधानसभाओं में इसको भी तोड़ा जाएगा। ऐसे में हरीश चौधरी के लिए अब नया चैलेंज होगा।
जिलों के पुनर्गठन के बाद अब सवाल यह है कि विधानसभा का परिसीमन किस तरह से होगा? राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, बाड़मेर में एक नई विधानसभा की कल्पना की जा रही है। इसमें बायतु, बाटाडू, उण्डू तक के इलाके को मिलाते हुए नई विधानसभा बन सकती है। उधर, शिव के भी दो हिस्से हो सकते हैं।
इन दो नई गणित से भाजपा की अस्थिर हो रही राजनीति को पटरी पर लाने का प्रयत्न होगा। इधर, कांग्रेस के लिए भी दो गुटों में से कौन सा गुट अब इस इलाके में हावी होगा। यह भी बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
केके विश्नोई पहले बाड़मेर जिले के हिसाब से मंत्री माने जा रहे थे। लेकिन अब वे बालोतरा जिले से मंत्री हो गए हैं। ऐसे में बाड़मेर से भाजपा नेता का मंत्री बनाने की स्थिति आ सकती है। शिव और बाड़मेर से निर्दलीय विधायक हैं।
लिहाजा, अब चौहटन विधानसभा के विधायक के लिए किस्मत का द्वार खुलेगा या फिर जैसलमेर-पोकरण को साथ देखा जाए तो पोकरण से महंत प्रतापपुरी के लिए पत्ते खुल सकते हैं। जब भी मंत्रीमण्डल में फेरबदल हुआ।
जिलों में आए इस बदलाव ने अब भाजपा और कांग्रेस संगठन को भी बदलाव के लिए अवसर दिया है। धोरीमन्ना-गुड़ामालानी के नेता जो बाड़मेर के जिलाध्यक्ष हैं, उनके लिए यह धरातल खत्म हो सकता है। उधर, बायतु के जो नेता बाड़मेर बालोतरा में थे, उनको बाड़मेर में आना पड़ेगा।
ये तोड़ने की राजनीति कर रहे हैं और हम जोड़ने की राजनीति में विश्वास करते हैं। थार के लोगों की भावना पर यह वार किया गया है। लोगों की समस्या को बढ़ा दिया गया है। इस आधार पर विधानसभा का परिसीमन भी होगा तो यह आम आदमी के हित में नहीं होगा। जिलों के सीमांकन के केंद्र में जनता होनी चाहिए।
-हरीश चौधरी, विधायक, बायतु
धोरीमन्ना और गुड़ामालानी को पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित होकर बालोतरा में जोड़ा गया है। जनभावना इसके विरोध में है। बायतु को भी दो हिस्सों में बांटना राजनीति ही है। वास्तव में जनता के अनुरूप कार्य पिछली सरकार ने किया था, जिससे सभी लोग संतुष्ट थे। अब चारों तरफ से आम आदमी विरोध कर रहे हैं। पहले 70 किमी तक जिला मुख्यालय था, जो अब धोरीमन्ना के गांवों के लिए 150 किमी तक हो जाएगा। जनता व जनप्रतिनिधियों की रायशुमारी नहीं ली गई है। भाजपा के नेताओं की चुप्पी दर्शाती है कि उनको पता भी नहीं चला, केवल एक दो लोगों ने अपनी चलाई।
-लक्ष्मण गोदारा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस
बाड़मेर-बालोतरा जिला पुनर्गठन अधिसूचना को जनविरोधी हैं। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना को जबरन बालोतरा से जोड़ने से जनता को प्रशासनिक भटकाव, असुविधा और असुरक्षा का सामना करना पड़ेगा। यह फैसला बिना जनसुनवाई और जमीनी अध्ययन के लिया गया है। अधिसूचना निरस्त करने की मांग करते हैं, निर्णय वापस नहीं हुआ तो जनता लोकतांत्रिक आंदोलन करेगी।
-ठाकराराम माली, युवा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष
धोरीमन्ना व गुड़ामालानी उपखंड को लेकर राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ धोरीमन्ना में आमजन का शांतिपूर्ण धरना जारी है। यह फैसला जनता की सुविधा, सुरक्षा और न्याय के विरुद्ध है, जिससे लोगों को प्रशासनिक व कानूनी कार्यों के लिए दूर भटकना पड़ेगा। मैं धोरीमन्ना पहुंचकर इस न्यायपूर्ण आंदोलन में जनता के साथ खड़ा रहूंगा और सभी जागरूक नागरिकों से धरने में शामिल होने की अपील करता हूं।
-हेमाराम चौधरी, पूर्व मंत्री
Updated on:
04 Jan 2026 03:01 pm
Published on:
04 Jan 2026 03:00 pm
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