17 जून 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बालोतरा: मजदूरी पर निकले 4 सगे भाई, शाम को लौटने का वादा रह गया अधूरा, परिवार में पसरा मातम

Balotra Road Accident: बालोतरा के पाटोदी क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुई रोडवेज बस और कार में हुई भिड़ंत ने कोडूका गांव के एक परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। रोज की तरह मजदूरी के लिए घर से निकले 4 सगे भाई शाम को लौटने का भरोसा देकर गए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।

2 min read
Google source verification
Balotra Road Accident

बालोतरा सड़क हादसे में 4 सगे भाईयों की मौत, पत्रिका फोटो

Balotra Road Accident: बालोतरा के पाटोदी क्षेत्र में मंगलवार सुबह हुई रोडवेज बस और कार में हुई भिड़ंत ने कोडूका गांव के एक परिवार की खुशियां पलभर में उजाड़ दीं। रोज की तरह मजदूरी के लिए घर से निकले 4 सगे भाई शाम को लौटने का भरोसा देकर गए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। रोडवेज बस और कार की भीषण भिड़ंत में चारों भाइयों की मौत हो गई। एक ही परिवार के चार कमाऊ बेटों के असमय चले जाने से गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

कोडूका निवासी उदाराम (35), रेखाराम (33), जोगाराम (28) और विशनाराम पुत्र भंवरलाल मेघवाल प्रतिदिन कमठे पर मजदूरी और कारीगरी का कार्य करते थे। सोमवार को अमावस्या होने के कारण अवकाश था और पूरा परिवार एक साथ घर पर रहा। मंगलवार सुबह चारों भाई हमेशा की तरह काम पर जाने के लिए निकले थे, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह उनकी अंतिम यात्रा साबित होगी। दुर्घटना के बाद गांव में ऐसा सन्नाटा पसरा मानो किसी ने पूरे इलाके की आवाज छीन ली हो।

पीछे छूट गए अधूरे सपने

मृतकों में उदाराम, रेखाराम और विशनाराम विवाहित थे। मृतक उदाराम के दो पुत्र और एक पुत्री हैं, जबकि रेखाराम और विशनाराम के भी दो-दो पुत्र हैं। वहीं जोगाराम अविवाहित था और बोल नहीं सकता था। परिवार के लोग बताते हैं कि चारों भाई एक ही आंगन में बैठते, साथ भोजन करते और दिनभर की थकान के बाद हंसी-ठिठोली में समय बिताते थे।

आज उसी आंगन में सन्नाटा पसरा है। चारों भाइयों की एक बहन ममता है, जो कुछ समय पहले ही अपनी बीमार दादी से मिलने घर आई थी। आगामी रक्षाबंधन को लेकर उसने भी कई सपने संजोए थे, लेकिन अब वे सपने अधूरे रह गए। परिवार की महिलाओं का विलाप और बच्चों की सिसकियां हर किसी की आंखें नम कर रही हैं।

बुजुर्ग माता-पिता और बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़

परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और दादी हैं, जिनका सहारा यही चारों बेटे थे। अब परिवार के सामने जीवन-यापन और बुजुर्गों की देखभाल का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। घर में मासूम बच्चों का बार-बार अपने पिता को पुकारना और महिलाओं का विलाप हर किसी की आंखें नम कर रहा है। मासूम बच्चों की जुबान पर बार-बार एक ही सवाल था “हमें पापा से मिलना है।” लेकिन उनके पिता अब ऐसी दुनिया में जा चुके थे, जहां से लौटना संभव नहीं। वहीं बुजुर्ग माता-पिता और दादी की हालत देख हर किसी का कलेजा भर आया। ग्रामीणों के अनुसार दिनभर कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।

मोर्चरी में रखे शव, अस्पताल के बाहर धरना जारी

चारों मृतकों के शव अस्पताल की मोर्चरी में रखे हुए हैं। वहीं घटना के बाद ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर धरना देकर परिवार को सरकारी सहायता, एक सदस्य को सरकारी नौकरी, सड़क सुरक्षा के लिए वाहनों की गति पर नियंत्रण तथा नई डामरीकृत सड़क पर रैंप निर्माण सहित विभिन्न मांगें रखीं है। देर शाम तक धरना जारी रहा और गांव में शोक का माहौल रहा। लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल था कि आखिर उस परिवार का सहारा अब कौन बनेगा, जिसके चारों कमाऊ बेटे एक ही हादसे में काल के गाल में समा गए।

बड़ी खबरें

View All

बाड़मेर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग