क्योंकि ज्येष्ठ माह की गर्मी के बीच बारिश नहीं होने से उनको और इंतजार करना पड़ेगा। एेसे में करीब सवा चार लाख किसानों को हळ जोतने का इंतजार है। हालांकि हाल ही में हुई बारिश के चलते कहीं-कहीं हळ चले लेकिन पूरे जिले को अभी भी खेती का इंतजार है। जिले में मानसून का इंतजार किसान पूरे साल करते हैं, क्योंकि यहां की खेती बारिश पर ही निर्भर है। जिले में करीब १९ लाख हैक्टेयर में खरीफ की बुवाई होती है। अमूमन मई के आखिरी सप्ताह से जून तक भरपूर बारिश होती है जिस पर किसान आखातीन आते ही खेती-बाड़ी में जुट जाते हैं। एेसी मान्यता है कि आखातीज पर हळवा मेह होता है, इस बार भी अक्षय तृतीय व हाळी अमावस्या पर हल्की बूंदाबांदी हुई तो लगा कि अब बारिश का दौर शुरू होगा। इसके बाद तूफान की आशंका के बीच मौसम विभाग ने बाड़मेर में तूफान के साथ तेज बारिश की चेतावनी दी तो किसान खुश हुए कि बारिश मानसून से पहले हो जाएगी, लेकिन तूफान का असर जिले में नहीं हुआ और बारिश का इंतजार रहा।