शिक्षक सीधी भर्ती के चयनित दिव्यांग अभ्यर्थियों की मेडिकल जांच चल रही थी। इस दौरान एक महिला अभ्यर्थी बोर्ड के सामने जांच के लिए पेश हुई। सुनने और बोलने में अक्षम बताई गई। बोर्ड सदस्यों ने उसका परीक्षण करने के लिए एक कागज पर लिखा कि अपने पिता का नाम लिखो, अभ्यर्थी नाम तक नहीं लिख सकी। तब सदस्यों को अभ्यर्थी के डमी होने का संदेह हुआ। बोर्ड ने महिला अभ्यर्थी के साथ आए युवक से कहा कि इसके पिता कहां है, उसने बताया कि बाहर बैठे है, बोर्ड ने पिता को बुलाने का कहा तो युवक संदिग्ध अभ्यर्थी को साथ लेकर बाहर चला गया। इस दौरान बोर्ड सदस्य करीब आधे घंटे से अधिक समय तक इंतजार करते रहे। लेकिन अभ्यर्थी के वापस नहीं लौटने पर उनका संदेह पक्का हो गया कि मूल अभ्यर्थी के स्थान पर एवजी का स्वास्थ्य परीक्षण करवाने का प्रयास किया गया। इसके बाद सदस्यों ने साथ आए युवक के मोबाइल पर फोन किया तो उसने रिसीव नहीं किया। बाद में चिकित्सक के नम्बर को युवक ने ब्लॉक कर दिया।