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भारत-पाक सरहद का अंतिम शिवालय: 1965 की जंग में पाकिस्तानी सेना ने की थी तोड़फोड़, अपने साथ ले गए थे मूर्तियां

Munabao Shiva Temple: भारत-पाक सीमा के मुनाबाव में 120 साल पुराना शिव मंदिर आज वीरान है। यह मंदिर बंटवारे और 1965 की जंग का गवाह रहा है। थार एक्सप्रेस शुरू होने पर यहां फिर रौनक लौटी, लेकिन ट्रेन बंद होने के बाद मंदिर फिर सूना पड़ गया।
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भारत-पाक सीमा स्थित मुनाबाव में भगवान शिव का मंदिर (Photo-Patrika)

गडरारोड . भारत-पाक सीमा स्थित मुनाबाव में भगवान शिव का प्राचीन ऐतिहासिक मंदिर है। बताया जाता हैं कि 1904 के आसपास अंग्रेजों के समय जब जोधपुर- हैदराबाद (अब पाकिस्तान) रेलवे ट्रैक का निर्माण किया जा रहा था, उस समय रेल कर्मचारियों के साथ स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर मुनाबाव रेलवे स्टेशन के सामने शिव मंदिर का निर्माण करवाया था। 1947 में देश के विभाजन के बाद यह मंदिर भारतीय सीमा के अंतिम शिवालय के रूप में पहचाना जाने लगा। उस समय जोधपुर-हैदराबाद तक चलने वाली रेल के यात्री इस मंदिर में पूजा-पाठ कर मंगल कामना के साथ सुखद यात्रा की प्रार्थना करते थे।


1962 में रेलवे कर्मचारियों, आरएसी, बीएसएफ, सेना के जवानों और स्थानीय मुनाबाव, अकली, सजनाणी गांव के ग्रामीणों ने मिलकर पुन: इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया और विधिवत पूजा याचना करते रहे। इस बीच 1965 में भारत-पाक युद्ध हुआ और इस युद्ध के दौरान पाकिस्तानी सेना मुनाबाव की सरहद में घुस गई। उन्होंने मंदिर में तोड़फोड़ की और बहुमूल्य मूर्तियां अपने साथ ले गए। उसके बाद यहां रेल भी बंद हो गई। तब से यह मंदिर भी निर्जीव सा हो गया और जो स्थानीय आबादी थी वह भी सरहद के कारण विस्थापित होकर दूर गांवों में जाकर बस गई। इसी बीच अकली व सजनाणी के ग्रामीणों ने आपसी जनसहयोग व बीएसएफ, सेना, कस्टम, पुलिस के सहयोग से मंदिर में शिवलिंग व मूर्तियां स्थापित कर पूजा प्रार्थना प्रारंभ की।


पिछले कुछ वर्षों से सीमा जन कल्याण समिति के कार्यकर्ताओं ने मिलकर यहां शिवरात्रि को जागरण प्रारंभ किया है। स्थानीय ग्रामीण देवी सिंह अकली ने 6 बीघा जमीन मन्दिर को दान की है। सीमा जनकल्याण समिति कार्यकर्ताओं के सहयोग से एक पानी का टांका व दो कमरे बनाए गए हैं। - नीम्बसिंह अकली, तहसील अध्यक्ष, सीमा जनकल्याण समिति गडरारोड़

बॉर्डर व अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन देखने आने वाले पर्यटकों को जब इस मन्दिर की ऐतिहासिकता का परिचय मिलता है, तो वे इसे देखने अवश्य पहुंचते हैं। पर्यटन विभाग मुनाबाव बॉर्डर दर्शन के साथ पाक सरहद के इस अंतिम शिवालय को भी शामिल करे, तो यहां कई लोग नमन करने पहुंच सकते हैं। -ताराराम बालाच, गडरारोड

थार एक्सप्रेस से फिर लौटी रौनक

2006 में भारत-पाकिस्तान के बीच जब थार एक्सप्रेस का संचालन शुरू हुआ तो इस शिवालय की रौनक भी लौट आई। यहां पर तैनात बीएसएफ, रेल कार्मिकों सहित कस्टम व अन्य स्टाफ ने मंदिर की सेवा-पूजा संभाल ली। भारत-पाक के यात्री अंतरराष्ट्रीय रेलवे स्टेशन के अंदर ही नमन, वंदन करके यात्रा शुरू करते थे।

थार एक्सप्रेस बंद, फिर छाई वीरानी

भारत द्वारा कश्मीर में धारा 370 को हटाने के बाद दोनों देशों के बीच रिश्तों के मिलन की थार एक्सप्रेस बंद हो गई। तब से यह शिवालय भी वीरान हो गया है।

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