25 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Rajasthan Election 2023: इस सीट पर अब तक भाजपा एक बार जीती, क्या इस बार कांग्रेस को दे पाएंगी पटखनी

Rajasthan Election 2023: भाजपा के लिए बाड़मेर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार तय करना मुश्किल हो गया है। ऐसा इसलिए नहीं है कि तीन बार से लगातार यहां भाजपा हारी है, असल में 1952 से अब तक केवल एक बार ही भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की है।

2 min read
Google source verification
Rajasthan Election 2023 : Know about Barmer Constituency seat BJP And Congress

Rajasthan election 2023 : बाड़मेर। भाजपा के लिए बाड़मेर विधानसभा सीट पर उम्मीदवार तय करना मुश्किल हो गया है। ऐसा इसलिए नहीं है कि तीन बार से लगातार यहां भाजपा हारी है, असल में 1952 से अब तक केवल एक बार ही भाजपा ने यहां से जीत दर्ज की है। बार-बार हार रही भाजपा के तमाम प्रयोग विफल होने के बाद अब प्रदेश से लेकर केन्द्र स्तर तक के नेताओं का मंथन चल रहा है कि बाड़मेर में ऐसा कौनसा चेहरा उतारा जाए जो भाजपा को हॉट सीट में मुकाबले की स्थिति में लाए।

तीन बार जीत से कांग्रेस का धरातल मजबूत
कांग्रेस यहां लगातार तीन बार से जीत रही है। कांग्रेस के लिए यह मजबूत धरातल बना हुआ है। कांग्रेस का जातिगत समीकरण भी अब तक सफल रहने से पार्टी के लिए बाड़मेर सीट पक्ष में रही है।

भाजपा चेहरे बदलने का प्रयोग
- भाजपा यहां चेहरे बदलने के प्रयोग हर बार करती रही है। पिछले तीन चुनावों का गणित देखे तो मृदुरेखा चौधरी को 2008 में टिकट दिया तब कद्दावर गंगाराम चौधरी दावेदार थे। गंगाराम नाराज हुए, महापंचायत बुलाई। भाजपा दो भाग हुई और मृदुरेखा की हार हुई।

- 2013 मृदुरेखा चौधरी का टिकट काटकर गंगाराम चौधरी की पोती प्रियंका चौधरी को टिकट दिया, ,मृदुरेखा नाराज हुई। भाजपा को हार का सामना करना पड़ा।

- 2018 कर्नल सोनाराम चौधरी को टिकट दिया, प्रियंका को टिकट नहीं मिला। फिर,भाजपा में दो भाग हुए औैर कर्नल सोनाराम को हार का सामना करना पड़ा।

यह भी पढ़ें : Rajasthan Politics : ... तो कांग्रेस के इन 3 'दिग्गज' नेताओं का टिकट पक्का, लड़ेंगे चुनाव

अब भी ऊहापोह
अब भी भाजपा इस ऊहापोह में है कि आखिर किसे बनाएं बाड़मेर का चेहरा? सांसद कैलाश चौधरी पर जोर है लेकिन वे आनाकानी कर रहे है। इसके अलावा एक दर्जन के करीब चेहरे उतावले है। इसमें से दो-तीन को ही पार्टी सीरियस ले रही है,पार्टी जीत के गणित को लेकर असमंजस में है।

कौन कितनी बार जीता
08 बार कांग्रेस
राम राज्य परिषद ने दो बार
लोकदल एक बार
निर्दलीय एक बार
जनता दल एक बार

यह भी जानिए
सर्वाधिक वोटों से जीत
33,611 वोटों से भाजपा के तगाराम चौधरी (1998)

सबसे कम वोट से हार
1318 वोटों से निर्दलीय उम्मेद सिंह ने वृद्धिचंद जैन को (1962)

विधायक सर्वाधिक
04 चार बार वृद्धिचंद जैन
03 तीन बार गंगाराम चौधरी
03 बार मेवाराम जैन

भाजपा केवल 01 जीत
2003 तगाराम चौधरी 30523 वोटे से
1993 में निर्दलीय गंगाराम चौधरी विधायक बने और बाद में भाजपा में शामिल हुए थे

यह भी पढ़ें : सीएम OSD लोकेश शर्मा भी लड़ेंगे चुनाव, एक नहीं- इन दो सीटों से जताई दावेदारी

कब कौन जीता

वर्ष-------------- जीत हार
1952--------- तनसिंह (राम राज्य परिषद) वृद्धिचंद जैन
1957 ---------तनसिंह (राम राज्य परिषद) रुक्मणी देवी
1962--------- उम्मेदसिंह (निर्दलीय) वृद्धिचंद जैन
1967--------- वृद्धिचंद जैन (कांग्रेस) उम्मेदसिंह
1972--------- वृद्धिचंद जैन (कांग्रेस) उम्मेदसिंह
1977--------- वृद्धिचंद जैन (कांग्रेस) उम्मेदसिंह
1980--------- देवदत्त तिवारी (कांग्रेस) रतनलाल
1985--------- गंगाराम चौधरी (लोकदल) रिखबदास जैन
1990--------- गंगाराम चौधरी (जनता दल) हेमाराम चौधरी
1993--------- गंगाराम चौधरी (निर्दंलीय ) वृद्धिचंद जैन
1998--------- वृद्धिचंद जैन (कांग्रेस) तगाराम चौधरी
2003--------- तगाराम चौधरी (भाजपा) वृद्धिचंद जैन
2008--------- मेवाराम जैन (कांग्रेस) मृदुरेखा चौधरी
2013--------- मेवाराम जैन (कांग्रेस) प्रियंका चौधरी
2018 ---------मेवाराज जैन(कांग्रेस) सोनाराम चौधरी