
Rajasthan HRRL Refinery Update - File PIC
राजस्थान के औद्योगिक और ऊर्जा इतिहास में एक नया मील का पत्थर साबित होने जा रही एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड (HRRL) से देश और प्रदेश के लिए एक राहत भरी खबर आई है। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया है कि बालोतरा जिले स्थित रिफाइनरी परिसर में सभी तकनीकी खामियों और मरम्मत कार्यों को पूरा करके मुख्य क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) को दोबारा सफलतापूर्वक चालू कर दिया गया है। यह कामयाबी इसलिए बेहद बड़ी है क्योंकि इसी वर्ष 20 अप्रैल 2026 को रिफाइनरी के निर्धारित भव्य उद्घाटन से ठीक 1 दिन पहले एक हाइड्रोकार्बन रिसाव के कारण इसके हीट एक्सचेंजर सर्किट में आग लग गई थी, जिससे उत्पादन और कमीशनिंग का काम पूरी तरह रुक गया था। अब लगभग 2 महीने की कड़ी मशक्कत के बाद इंजीनियरों ने इस खराबी को दूर कर रिफाइनरी को फिर से पूरी तरह चालू कर दिया है।
रिफाइनरी की मुख्य यूनिट्स यानी क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट (CDU) और वैक्यूम डिस्टिलेशन यूनिट (VDU) के दोबारा चालू होने से सभी प्रकार के फ्यूल प्रोडक्ट्स की प्रोसेसिंग लाइन्स पूरी तरह एक्टिव हो गई हैं। कंपनी ने बताया कि क्रूड ऑयल से निकलने वाले सभी प्रोडक्ट स्ट्रीम्स को अब आगे की प्रोसेसिंग के लिए डाउनस्ट्रीम यूनिट्स में सुरक्षित तरीके से भेजा जा रहा है।
इस री-स्टार्ट के साथ ही रिफाइनरी में बड़े पैमाने पर पेट्रोलियम उत्पादों का उत्पादन शुरू हो चुका है, जिनमें भारत स्टेज VI (BS-VI), कंप्लायंट हाई-स्पीड डीजल (HSD), लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG - रसोई गैस), पेट्रोलियम कोक (Petcoke) और नेफ्था (Naphtha) शामिल हैं।
एचपीसीएल (HPCL) के अनुसार, रिफाइनरी परिसर से एलपीजी और पेटकोक का कमर्शियल प्रोडक्शन और उनकी बाजार में बिक्री तुरंत प्रभाव से शुरू कर दी गई है। यह राजस्थान और आसपास के राज्यों में रसोई गैस और औद्योगिक ईंधन की आपूर्ति को सुचारू बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
बालोतरा रिफाइनरी से ईंधनों के वितरण को लेकर भी एक बेहद महत्वपूर्ण टाइमलाइन सामने आई है। रिफाइनरी प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, रिफाइनरी में तैयार किए जा रहे उच्च गुणवत्ता वाले BS-VI डीजल की पहली खेप को डिपो और बाजारों के लिए डिस्पैच करने का काम इसी सप्ताह के अंत तक शुरू कर दिया जाएगा।
वहीं दूसरी तरफ, आम वाहन चालकों के लिए सबसे जरूरी ईंधन यानी पेट्रोल के उत्पादन और उसकी बाजार में सप्लाई शुरू करने की तैयारियां भी अंतिम चरण में हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आगामी सप्ताह से रिफाइनरी से पेट्रोल का उत्पादन और उसकी गाड़ियों व ट्रकों के जरिए डिस्पैचिंग का काम पूरी तरह से शेड्यूल के अनुसार प्रारंभ हो जाएगा, जिससे राज्य में ईंधन की उपलब्धता और मजबूत होगी।
इस रिफाइनरी परियोजना के इतिहास में 20 अप्रैल 2026 का दिन एक बड़ा झटका लेकर आया था। दरअसल, 9 मिलियन टन सालाना क्षमता वाली इस मेगा रिफाइनरी का आधिकारिक उद्घाटन और फुल-स्केल कमीशनिंग की गतिविधियां 21 अप्रैल को प्रस्तावित थीं। लेकिन उद्घाटन से ठीक 1 दिन पहले क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट के एक महत्वपूर्ण हिस्से यानी 'हीट एक्सचेंजर स्टैक' में अचानक भीषण आग भड़क उठी।
प्रारंभिक तकनीकी जांच में यह बात सामने आई थी कि एक हीट एक्सचेंजर सर्किट के भीतर अचानक हाइड्रोकार्बन का रिसाव होने से यह दुर्घटना हुई थी। हालांकि, सुरक्षा प्रणालियों के तुरंत सक्रिय होने से आग को एक सीमित क्षेत्र में ही रोक लिया गया था और जान-माल का कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ था, लेकिन इस घटना के कारण रिफाइनरी को समय पर शुरू करने और उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाने (Ramp-up) के काम पर अस्थाई रूप से ब्रेक लग गया था। अब दो महीने बाद कंपनी सुरक्षित, स्थिर और कुशल संचालन पर पूरा ध्यान केंद्रित कर रही है।
बालोतरा के पचपदरा में स्थित यह रिफाइनरी साधारण तेल रिफाइनरियों जैसी नहीं है, बल्कि यह भारत की 24वीं रिफाइनरी होने के साथ-साथ देश के सबसे आधुनिक और जटिल औद्योगिक ढांचों में से एक है। इसकी विशेषताएं इसे दुनिया भर के तेल उद्योग में एक विशिष्ट स्थान दिलाती हैं
नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स : इस रिफाइनरी का नेल्सन कॉम्प्लेक्सिटी इंडेक्स 17 है, जो यह दर्शाता है कि यह बेहद भारी और अशुद्ध क्रूड ऑयल को भी रिफाइन करके उच्चतम गुणवत्ता वाले ईंधन और मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने में पूरी तरह सक्षम है।
हाई पेट्रोकेमिकल यील्ड : इस पूरे कॉम्प्लेक्स को इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसमें पेट्रोकेमिकल का उत्पादन 26% से भी अधिक होगा। आम तौर पर रिफाइनरियों में यह क्षमता बहुत कम होती है।
जब यह रिफाइनरी अपनी पूरी क्षमता के साथ काम करना शुरू कर देगी, तब यह केवल गाड़ियों का ईंधन ही नहीं बनाएगी, बल्कि औद्योगिक उपयोग में आने वाले कई महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल्स जैसे पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीइथाइलीन के विभिन्न वेरिएंट्स, बेंजीन और ब्यूटाडीन का भी बंपर उत्पादन करेगी, जिससे भारत की विदेशों से होने वाली आयात निर्भरता में भारी कमी आएगी।
इस पूरे प्रोजेक्ट का संचालन एक संयुक्त उद्यम यानी एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है, जिसमें हिस्सेदारी का गणित इस प्रकार तय है:
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड : इसके पास इस प्रोजेक्ट की 74% की मुख्य हिस्सेदारी (Stake) है।
राजस्थान सरकार : राज्य सरकार के पास इस मेगा प्रोजेक्ट की 26% की हिस्सेदारी है।
कुल 79,450 करोड़ रुपए की भारी-भरकम लागत से तैयार हो रहा यह कॉम्प्लेक्स आने वाले समय में केवल बालोतरा या बाड़मेर ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य को बदल देगा। इस रिफाइनरी से निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट्स और पेट्रोकेमिकल्स के कारण राजस्थान में परिवहन, पैकेजिंग, फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग) और कंस्ट्रक्शन (भवन निर्माण) से जुड़ी सैकड़ों सहायक औद्योगिक इकाइयां (Downstream Industries) स्थापित होने लगेंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
Updated on:
19 Jun 2026 12:32 pm
Published on:
19 Jun 2026 12:32 pm
