राजस्थान सरकार ने 2014 में ऊंट को राज्य पशु का दर्जा दिया और 2015 में दी राजस्थान ऊंट वध निषेध और अस्थायी प्रवास निर्यात नियमन बिल पास किया, जिसके तहत ऊंटों की तस्करी और मांस व्यापार कर रहे किसी व्यक्ति को 5 साल तक की सजा, 2000 रुपए तक जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन यह नियम ऊंटों के सरंक्षण की जगह उनकी घटती संख्या का कारण बन गया क्योकि राजस्थान में पुष्कर, तिलवाड़ा आदि मेलों में ऊंटों की खरीद-बिक्री की जाती हैं लेकिन इस कानून के पारित होने के बाद ऊंटों के टासर्पोटेशन पर प्रतिबन्ध लगने लगे। पुष्कर मेले में 2013 में 1700 ऊंट बेचे गए वहीं 2017 में यह संख्या 800 पर आ गई।