सर्किल की सुध नहीं
शहीद चौराहा यहां का मुख्य है। शहीदों की याद में बने इस सर्किल को एक कोने में लाया गया है,इसके बाद से इसके आगे गंदगी का ढेर खत्म होता है न ही टूटी सड़की की समस्या। शहीदों को लेकर कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्थाएं इसकी सुध नहीं ले तो सालभर तक भी इसकी सफाई को तरस जाए। इस चौराहे को रंगीन लाइट और व्यवस्थित रोशनी के साथ ही सौंदर्यकरण का हिस्सा बनाया जाए तो इस शहीद सर्किल को हर कोई सैल्यूट करता नजर आए लेकिन यहां दो-पांच लाख के खर्च को लेकर बरती जा रही कंजूसी गरीमामयी माहौल को खत्म कर रही है।
पुल पर हरियाली का इंतजार
दिल्ली सहित बड़े शहरों में अब शहर के बीचो-बीच बने ओवरब्रिज पर हरियाली के लिए पौधों की कतारें लगा दी है और जहां पर ओवरब्रिज के नीचे जगह है वहां पर हरियाली है या फिर पार्किंग का जोन। इतना व्यवस्थित नजर आता है कि शहर में आने वालों को भी सकून हों,लेकिन बाड़मेर के इन ओवरब्रिज के नीचे गंदगी का आलम है और खाली जमीन का सदुपयोग नहीं हो रहा है।