
बेगूसराय में महिला का सामूहिक दुष्कर्म (सांकेतिक तस्वीर)
Begusarai Gangrape case: बिहार के बेगूसराय जिले में 5 दरिंदों ने एक 28 साल की शादीशुदा महिला को बंधक बनाकर उसके साथ गैंगरेप किया। इतना ही नहीं आरोपियों ने महिला की बेरहमी से पिटाई करने और ब्लेड से हमला करने के बाद उसके प्राइवेट पार्ट्स में एक ज़िंदा कारतूस (गोली), पत्थर और लकड़ी के टुकड़े डाल दिए। यह बात घटना के पूरे छह दिन बाद तब सामने आई जब असहनीय दर्द से तड़पती महिला को अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसके शरीर से इन चीजों को निकालने के लिए सर्जरी की।
पीड़िता के बयान के अनुसार, यह घटना 11 जून की रात करीब 11:30 बजे हुई। जब महिला टॉयलेट जाने के लिए बाहर निकली, तो घात लगाए बैठे पांच बदमाशों ने घर का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया ताकि उसका पति न तो बाहर आ सके और न ही मदद के लिए चिल्ला सके। इसके बाद आरोपियों ने महिला को चिल्लाने से रोकने के लिए उसकी साड़ी से उसका मुंह कसकर बंद कर दिया और उसका ब्लाउज फाड़कर उसके हाथ-पैर बांध दिए।
हमलावर उसे घसीटकर एक सुनसान, अंधेरी जगह ले गए जहां उन पांचों ने बारी-बारी से उसके साथ दुष्कर्म किया। महिला उसे छोड़ देने की गुहार लगाती रही। इतना ही नहीं हमलावरों ने ब्लेड से महिला की छाती और जांघों पर कई बार वार किए, उसके प्राइवेट पार्ट्स में बाहरी चीजें घुसा दीं और उसके बेहोश शरीर को घर के पास फेंककर भाग गए।
कुछ समय बाद जब महिला को होश आया, तो वह किसी तरह कराहने और चिल्लाने में कामयाब रही। अंदर बंद उसके पति ने उसके रोने की आवाज सुनी और बाहर निकलने की पूरी कोशिश की, लेकिन दरवाजा बाहर से बंद था। उसने तुरंत अपनी छोटी ननद को फोन किया, जो मौके पर पहुंची और घर का दरवाजा खोला। पति ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और गंभीर हालत में पीड़िता को पहले बरौनी अस्पताल और फिर बेगूसराय सदर अस्पताल ले गए।
स्थानीय चकिया पुलिस और शुरुआती इलाज करने वाले डॉक्टरों की तरफ से बेहद गंभीर और संदिग्ध लापरवाही का मामला सामने आया है। महिला को 12 जून को भर्ती कराया गया था, लेकिन 13 जून को मिली मेडिकल रिपोर्ट में साफ़ तौर पर गैंग-रेप की पुष्टि हुई। इसके बावजूद, पुलिस ने मुख्य मुद्दे को दबा दिया और पीड़िता के बयानों को नजरअंदाज करते हुए सिर्फ़ मारपीट का मामला दर्ज किया। इसके अलावा, महिला को अपने अंदरूनी अंगों में लगातार दर्द हो रहा था। लेकिन डॉक्टरों ने इसे गंभीर यौन हमले के कारण होने वाला सामान्य दर्द मानकर नजरअंदाज कर दिया और लापरवाही बरतते हुए 12 जून की शाम को ही उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी।
अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद भी महिला का दर्द कम नहीं हुआ। बल्कि तकलीफ बढ़ती गई। 17 जून को जब दर्द बिल्कुल बर्दाश्त से बाहर हो गया और वह बेहोश हो गई, तो उसके परिवार वाले उसे वापस सदर अस्पताल ले गए। इस बार जब डॉक्टरों ने अच्छी तरह से जांच की तो महिला के प्राइवेट पार्ट्स के अंदर ठोस चीजें फंसी हुई पाई गईं। फिर डॉक्टरों की एक टीम ने सर्जरी की तैयारी की और 18 जून यानि आज महिला के प्राइवेट पार्ट्स से एक ज़िंदा कारतूस (गोली), एक पत्थर और लकड़ी का एक टुकड़ा निकाला।
DSP आनंद कुमार पांडे ने बताया कि पीड़िता का बयान मजिस्ट्रेट के सामने धारा 164 के तहत दर्ज किया गया है, जिसमें उसने पांचों आरोपियों द्वारा की गई बर्बरता की पूरी घटना बताई। आरोपियों की पहचान करने और उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की स्पेशल टीमें बनाई गई हैं। इसके अलावा, DSP ने कहा कि चकिया पुलिस स्टेशन के उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ लापरवाही के लिए सख्त अनुशासनात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी, जिन्होंने दुष्कर्म के मामले को मारपीट के रूप में दर्ज किया।
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Updated on:
18 Jun 2026, 8:11 PM IST
Published on:
18 Jun 2026, 7:45 PM IST
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