
Bharatpur Election : भाजपा और कांग्रेस की फाइल फोटो पत्रिका
Bharatpur Election : भरतपुर नगर निकाय चुनाव में इस बार मुकाबला महज भाजपा और कांग्रेस के बीच नहीं है। टिकट वितरण के बाद दोनों दलों से बगावत कर चुनाव मैदान में उतरे निर्दलीय प्रत्याशियों ने चुनावी गणित को पूरी तरह बदल दिया है। शहर के 65 वार्डों में कई जगह मुकाबला त्रिकोणीय और बहुकोणीय हो चुका है। ऐसे में चुनाव परिणाम के बाद शहर की सरकार बनाने से लेकर मेयर की कुर्सी तक पहुंचने में निर्दलीय पार्षद 'किंगमेकर' की भूमिका में नजर आएंगे।
भरतपुर में सत्ताधारी भाजपा बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत लगा रही है। संगठन ने वार्डवार रणनीति तैयार कर प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के प्रयास तेज कर दिए है। कांग्रेस भी भाजपा को रोकने और अपना बोर्ड बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। दोनों दल अपने-अपने स्तर पर बहुमत का दावा कर रहे हैं, लेकिन जमीनी समीकरण इन दावों के बीच कई सवाल खड़े कर रहे है।
राजनीतिक आकलन में भाजपा वर्तमान स्थिति में कांग्रेस से 'इक्कीस' मानी जा रही है। कांग्रेस भी कई वार्डो में कड़ी चुनौती दे रही है, लेकिन बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उसे कई अतिरिक्त वार्डों में सेंध लगानी होगी। वहीं 65 सदस्यीय बोर्ड में बहुमत के लिए 33 पार्षदों की जरूरत होगी। यही वह आंकड़ा है, जहां निर्दलीयों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है। टिकट नहीं मिलने से दोनों दलों के कई दावेदार निर्दलीय मैदान में उतर गए। इनमें कुछ ऐसे चेहरे भी हैं, जिनका अपने वार्ड में व्यक्तिगत प्रभाव और राजनीतिक पकड़ है। करीब आधे वार्डों में ये प्रत्याशी भाजपा-कांग्रेस के परंपरागत वोटों में सेंध लगाते नजर आ रहे है। इससे दोनों प्रमुख दलों का सीधा मुकाबला कई जगह त्रिकोणीय हो गया है।
यदि भाजपा या कांग्रेस बहुमत के 33 के आंकड़े से पीछे रहती है तो बोर्ड गठन के लिए निर्दलीय पार्षदों का समर्थन लेना जरूरी होगा। यहीं से चुनाव के बाद असली राजनीतिक खेल शुरू होने की संभावना है। कौन सा दल कितने निर्दलीयों को अपने साथ जोड़ पाता है, यह बोर्ड गठन में निर्णायक होगा। इसका सीधा असर मेयर की राजनीति पर भी पड़ेगा। मेयर पद के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं के सामने पार्षदों का समर्थन जुटाने की चुनौती होगी। ऐसे में निर्दलीय पार्षद महज बोर्ड गठन के लिए संख्या पूरी करने वाले सदस्य नहीं, बल्कि मेयर की कुर्सी के लिए भी निर्णायक वोट बैंक बनेंगे।
भरतपुर नगर निकाय चुनाव में प्रचार का शोर सोमवार शाम 6 बजे थम गया। मतदान से 48 घंटे पहले लागू होने वाली मौन अवधि के तहत अब 9 सितम्बर को मतदान समाप्त होने तक चुनाव प्रचार प्रसार पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। नगरपालिकाओं में मतदान 9 सितम्बर को सुबह 7 से शाम 6 बजे तक होगा। जिला निर्वाचन अधिकारी कमर चौधरी ने बताया कि मौन अवधि के दौरान लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 126 सहित संबंधित प्रावधान लागू रहेंगे।
इस दौरान राजनीतिक दल, प्रत्याशी और उनके समर्थक किसी भी माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास नहीं कर सकेंगे। मौन अवधि में सार्वजनिक सभा, नुक्कड़ सभा, रोड शो, जनसभा, कोना बैठक, पदयात्रा और किसी भी प्रकार के चुनावी जुलूस पर रोक रहेगी। मनोरंजन, सांस्कृतिक, संगीत कार्यक्रम और नाट्य प्रस्तुतियों के जरिए भी चुनाव प्रचार नहीं किया जा सकेगा। मतदान केन्द्र के 100 मीटर के दायरे में प्रचार, भीड़ जुटाना और प्रचार सामग्री बांटना भी पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा।
अब मतदान समाप्ति तक मतदान क्षेत्र में शराब का वितरण, परिवहन, भंडारण और सेवन प्रतिबंधित रहेगा। इस दौरान शराब की दुकानें, बार और अनुज्ञप्ति प्राप्त परिसर बंद रहेंगे। उल्लंघन पर अनुज्ञप्ति निलंबन सहित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फेसबुक, वाट्सएप, इंस्टाग्राम, एक्स सहित सोशल मीडिया और अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर चुनावी विज्ञापन, भाषण, वीडियो या प्रचार सामग्री प्रकाशित और प्रसारित नहीं की जा सकेगी। एग्जिट पोल, ओपिनियन पोल और सर्वे के परिणामों के प्रकाशन पर भी रोक रहेगी।
प्रत्याशी, राजनीतिक दल या समर्थक मतदाताओं को मतदान केन्द्र तक लाने-ले जाने के लिए वाहनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। हालांकि दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों के लिए शासकीय व्यवस्था के तहत अनुमन्य परिवहन सुविधा उपलब्ध रहेगी। जिला निर्वाचन प्रशासन ने सभी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों से मौन अवधि एवं आदर्श आचार संहिता की पालना करने की अपील की है। उल्लंघन होने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
Updated on:
08 Sept 2026 05:13 pm
Published on:
08 Sept 2026 05:13 pm
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