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भरतपुर: खांसी की सिरप पीने से दो साल के मासूम की मौत, एक और मामला आया सामने

परिजनों ने बताया कि बच्चे को एक ढक्कन सिरप पिलाई गई, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। मासूम को दोबारा वैर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने भरतपुर रेफर कर दिया।
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भरतपुर

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Kamal Mishra

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Updated: 2 Oct 2025, 4:59 PM IST

Bharatpur death

फाइल फोटो-पत्रिका

भरतपुर। जिले के वैर उपखंड में खांसी की सिरप पीने से दो साल के मासूम की मौत का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार, गांव लुहासा निवासी निहालसिंह गुर्जर का बेटा तीर्थराज (2) पिछले दिनों मामूली खांसी-जुकाम से पीड़ित था। निहालसिंह अपने बेटे को इलाज के लिए राजकीय उप जिला चिकित्सालय वैर लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टर ने दवाइयों के साथ खांसी की सिरप भी दी।

परिजनों के अनुसार, घर लौटकर बच्चे को एक ढक्कन सिरप पिलाई गई, जिसके कुछ ही देर बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। मासूम को दोबारा वैर अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर देख डॉक्टरों ने भरतपुर रेफर कर दिया। वहां से उसे जयपुर एसएमएस अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान मासूम की मौत हो गई। इस घटना से गांव और इलाके में शोक की लहर है। परिजन का आरोप है कि सरकारी अस्पताल से मिली सिरप पीने के बाद ही बच्चे की हालत बिगड़ी। अब ग्रामीण और परिजन मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

संदिग्ध कफ सिरप पर उठ रहे सवाल

राजस्थान में बच्चों की मौत और बीमारी के मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर स्थित केसंस फार्मा कंपनी द्वारा निर्मित इसी सिरप के सेवन से भरतपुर और सीकर जिलों में दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 बच्चे गंभीर रूप से बीमार बताए जा रहे हैं। यह दवा सरकारी अस्पतालों में मुफ्त दवा योजना के तहत उपलब्ध कराई गई थी।

पहले भी आ चुका है मामला

बच्चों में सिरप लेने के बाद उल्टी, बेचैनी और कई घंटों तक बेहोशी जैसे लक्षण देखे गए। यह पहली बार नहीं है जब कंपनी विवादों में आई हो। 2023 में इसकी एक दवा में खामियां मिलने पर टेंडर से प्रतिबंधित किया गया था। वहीं, 2021 में दिल्ली में इसी डेक्स्ट्रोमेथॉर्फन युक्त सिरप से 16 बच्चे बीमार पड़ गए थे। इसके बावजूद कंपनी को नए टेंडर दिए जाते रहे। वहीं कंपनी मालिक वीरेंद्र कुमार गुप्ता फरार बताया जा रहा है।