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न कोच न संसाधान, कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं

- एक स्थायी, चार कोच संविदा पर- खिलाड़ी खुद करते अभ्यास

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न कोच न संसाधान, कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं

न कोच न संसाधान, कैसे निखरें खेल प्रतिभाएं

भरतपुर. खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए राज्य सरकार ने वर्ष 2021-22 के बजट में जिले के लिए 17 करोड़ 75 लाख रुपए के बजट आवंटित किया था। इसके तहत लोहागढ़ स्टेडियम में करीब आठ करोड़ रुपए की लागत से मल्टीपरपज इनडोरल हॉल तैयार कराया गया। साथ ही कई अन्य काम भी करवाए गए। इससे यहां आने वाले खिलाडिय़ों को बेहतर प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके और जिले की खेल प्रतिभाएं निखर सकें। मगर स्टेडियम में आज भी कई खेलों के कोच न होने से जिले की प्रतिभाएं इन खेलों से दूरी बनाए हैं। साथ ही स्टेडियम में ये खेल दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। ऐसा नहीं कि जिम्मेदारों या सरकार को इसकी जानकारी नहीं है। इससे सरकारी की खेलों को बढ़ावा देने वाली बात खोखली साबित होती नजर आती है।
सरकार की ओर से प्रदेश के सभी स्टेडियम में संविदा पर कोच लगाते का जिम्मा प्रहलाद नारायण कॉन्ट्रेक्टर एजेंसी को दिया है। एजेंसी ने लोहागढ़ स्टेडियम में राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद से अनुबंध के तहत विभिन्न खेलों में पांच कोच नियुक्त भी किए हैं, लेकिन इसके बाद भी उन खिलाडिय़ों को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इनके खेल से संबंधित यहां कोच ही नहीं हैं। जबकि स्टेडियम में प्रत्येक खेल से संबंधित अलग स्थान बने हुए हैं।

अन्य स्टेडियम में जाने को मजबूर खिलाड़ी

स्टेडियम में आने वाले खिलाडिय़ों को अपनी रुचि के खेल में कोच की कमी का पता लगने पर खिलाड़ी या तो किसी निजी एकेडमी या फिर अन्य जिले में आने को मजबूर हैं। जब खिलाडिय़ों को अपने रुचि के खेल का कोच अन्य स्थान पर उपलब्ध होता है तो उन्हें लगता है कि हमारी सरकार खेलों के प्रति सजग नहीं है। वहीं अन्य स्थान पर जाने में असमर्थ खिलाडिय़ों की प्रतिभा भी चारदीवारी में ही दम तोड़ देती है।

हैण्डबॉल का रेलवे स्कूल में मिलता प्रशिक्षण

हैण्डबॉल के खिलाड़ी स्टेडियम में प्रवेश के लिए आते हैं तो उनका प्रवेश लेने के बाद उन्हें प्रशिक्षण के लिए रेलवे स्कूल में जाना पड़ता है। इसका कारण स्टेडियम में कोच न होना है। रेलवे स्कूल के कोच को पार्ट टाइम के लिए लगाया हुआ है। ऐसे में दूर-दराज से आने वाले खिलाडिय़ों को रेलवे स्कूल तक जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

खेल कोच (परमानेन्ट) कोच (संविदा पर)
- बैडमिंटन - -
- कबड्डी - -
- सॉफ्टबॉल 1 1
- कुश्ती - 2
- एथलैटिक्स - 1
- बास्केटबॉल - -
- हैण्डबॉल - -
- क्रिकेट - 1

इनका कहना है ...

- कई खेलों के कोच न होने की समस्या लंबे समय से चली आ रही है।कईबार कोच के अभाव में खिलाडिय़ों को प्रवेश के लिए मना करना पड़ता है।इससे उन्हें भी निराशा होती है।प्रत्येक खेल का कोच नियुक्त करने के लिए सरकार को लिखित में दिया हुआ है।

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अभिषेक पंवार, कार्यकारी खेल अधिकारी

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