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परी बोली, “पापा भाई के साथ मुझे भी ले चलो, नए कपड़े लाने हैं” कुछ देर बाद पूरे परिवार की मौत, दो दिन से रोए जा रही दादी…

Bharatpur Accident Sad Story : इस घटना के बाद से गांव में मातम जैसा माहौल है। आसपास के ग्रामीणों ने न दीपक जलाए और न ही घरों को सजाने के लिए लाइटें लगाईं। धनतेरस और छोटी दिवाली पर औपचारिक रूप से पूजन किया गया है। आज दिवाली पर भी यही माहौल रहने वाला है।

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Bharatpur Family Died In Accident

Bharatpur Family Accident Before Diwali: भरतपुर के नदबई में दिवाली की रौनक से सजे गांव में मातम पसरा हुआ है। दादी अपने पोते-पोती और बेटा-बहू को याद कर रोये जा रही है, दुख इतना बड़ा है कि परिवार या गांव का कोई सदस्य बुजुर्ग मां को ढांढस तक नहीं बंधा पा रहा है। आज दिवाली पर गांव में बैठक की जा रही है। शनिवार को भरतपुर के नदबई में हुए हादसे ने पूरे परिवार को लील लिया है। तेज रफ्तार थार ने पूरा परिवार उजाड़ दिया था। उस जिसमें पति, पत्नी और दो बच्चों की मौके पर मौत हो गई। हादसे की वजह बनी वही रफ्तार, जो कुछ ही पलों में खुशियों को उजाड़ गई।

मरने वालों की पहचान नटवर 35, पत्नी पूजा, बेटी परी 6 और बेटा दीपू 1.5 के रूप में हुई थी। यह परिवार दीपावली की खरीदारी के लिए घर से निकला था। नटवर ने सुबह खेत जोता था और दोपहर को पत्नी और बच्चों के साथ नदबई बाज़ार जा रहा था।

दादी बोली…. पोती को नहीं ले जा रहे थे, लेकिन उसे नए कपड़े खरीदने थे

नटवर की मां का कहना है कि पोती परी को उसके माता-पिता लेकर नहीं जा रहे थे, बेटा ससुराल जाने और सरसों के बीज लेने के लिए जा रहा था। साथ में डेढ़ साल का बेटा भी था। बेटी परी उनके साथ नहीं जाने वाली थी। लेकिन अचानक उसे नए कपड़े लाने की सूझी, उसने कहा कि पापा मुझे भी ले चलो, नए कपड़े दिला लाओ, किसे पता था कि कुछ ही देर बाद मेरा पूरा परिवार हमेशा के लिए बिछड़ जाएगा।

दरअसल गांव से करीब आठ किमी दूर ही हवा की रफ्तार से दौड़ रही थार ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया, चारों ने दम तोड़ दिया। टक्कर के बाद दोनों गाड़ियों में आग लग गई थी।

डीएसपी नदबई अमर सिंह राठौड़ ने बताया कि हादसे का कारण थार की ओवर स्पीड थी। थार चला रहा युवक नरेश गंभीर रूप से घायल है और आरबीएम अस्पताल में भर्ती है। इलाज के बाद उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। वह पुलिस की देखरेख में है।

गांव में मातम जैसा माहौल, दीपक नहीं जले, लाइटें हटा दी

इस घटना के बाद से गांव में मातम जैसा माहौल है। आसपास के ग्रामीणों ने न दीपक जलाए और न ही घरों को सजाने के लिए लाइटें लगाईं। धनतेरस और छोटी दिवाली पर औपचारिक रूप से पूजन किया गया है। आज दिवाली पर भी यही माहौल रहने वाला है। नटवर की मां शोभा देवी बार-बार बेटे का कमरा देखकर बेहोश हो रही हैं। आंगन में रखी पोती परी की किताबें और टूटे खिलौने अब घर की चुप्पी में दर्द बनकर गूंज रहे हैं।

गांव के लोगों ने कहा कि दिवाली पर जहां हर घर में खुशियां होनी चाहिए थींए वहां चार चिताएं जल उठीं। एक लम्हे की लापरवाही ने चार ज़िंदगियां निगल लीं। रफ्तार की इस कीमत ने पूरे गांव को सन्न कर दिया है। गांव के लोगों का कहना है कि आज तक गांव में इस तरह का कोई हादसा नहीं हुआ है।