
अस्पताल में भर्ती युवती। फोटो पत्रिका
Rajasthan : घर में रखा पुराना खांसी का सिरप पीने के बाद एक युवती की तबीयत अचानक बिगड़ गई। चक्कर आने, उल्टियां होने और शरीर में दर्द की शिकायत बढ़ने पर परिजन उसे आरबीएम अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने तुरंत भर्ती कर इलाज शुरू किया।
मां शिप्रा अग्रवाल निवासी दही वाली गली ने बताया कि उनकी बेटी अनुष्का (22 वर्ष) को तीन दिन से खांसी थी। शनिवार रात भी उसकी खांसी नहीं रुकी। रात करीब तीन बजे अनुष्का ने घर में रखा पुराना खांसी का सिरप (डेक्स्ट्रोमेथॉफन) खुद ही पी लिया और सो गई। परिवार के लोगों को इसकी जानकारी नहीं थी। सुबह सभी लोग उठ गए, लेकिन अनुष्का नहीं जागी। करीब 9 बजे उसे उठाया गया तो उसकी हालत देखकर परिजन भी हैरान रह गए। उठते ही उसे तेज चक्कर आने लगे, लगातार उल्टियां होने लगीं और शरीर में तेज दर्द की शिकायत होने लगी। परिजन तुरंत उसे नजदीकी डॉक्टर के पास ले गए।
जांच करने पर डॉक्टर ने बताया कि युवती ने देर रात खांसी की दवा पी थी, जिसके रिएक्शन की आशंका है। इसके बाद चिकित्सक ने तत्काल उसे आरबीएम अस्पताल रैफर कर दिया, जहां उसका उपचार चल रहा है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार अनुष्का की हालत पहले से ठीक है। डॉक्टरों ने सलाह दी है कि बिना परामर्श दवा न लें और विशेषकर पुरानी या एक्सपायरी के करीब दवाओं का उपयोग नहीं करें, क्योंकि इससे गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।
सर्दी के उतार-चढ़ाव के बीच खांसी-जुकाम के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में कफ सिरप की किल्लत ने मरीजों की परेशानी बढ़ा दी है। अस्पतालों में कफ सिरप नहीं मिलने पर लोग मजबूरी में मेडिकल स्टोरों से महंगी दवाइयां खरीदने को विवश हैं।
सूत्रों के अनुसार अस्पतालों में उपलब्ध कफ सिरप डेक्स्ट्रोमेथॉफन का स्टॉक तो है, लेकिन हाल ही में इस सिरप के सेवन से तबीयत बिगड़ने और मौत जैसे गंभीर मामले सामने आने के बाद सरकार ने इसके उपयोग पर रोक लगा दी है। अस्पताल प्रशासन की ओर से भी स्थानीय स्तर पर नई दवा खरीदने की पहल नहीं की गई है। नतीजतन अस्पतालों में साधारण खांसी-जुकाम से लेकर बलगम वाली खांसी की दवाएं तक उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि अस्पताल प्रशासन का दावा है कि अन्य कई सॉल्ट के सिरप अस्पताल में मरीजों को दिए जा रहे हैं। इन दिनों ओपीडी में सर्दी, बुखार, खांसी और जुकाम के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ज्यादातर मरीजों को डॉक्टर कफ सिरप की जरूरत बताते हैं, लेकिन दवा स्टॉक में नहीं होने के कारण उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई मरीजों का कहना है कि जब अस्पतालों में बुनियादी दवाएं भी उपलब्ध नहीं हैं तो इलाज का भरोसा बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है।
डेक्स्ट्रोमेथॉफन सिरप बंद है। अन्य सॉल्ट के कई सिरप सरकार की ओर से आ रहे हैं, जो मरीजों को दिए जा रहे हैं। यह खास सॉल्ट का सिरप ही बंद किया है। इसके विकल्प के तौर पर अन्य कई सिरप हैं।
डॉ. मनीष चौधरी, प्रभारी जिला औषधि भंडार भरतपुर
Published on:
01 Dec 2025 11:36 am
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