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राजस्थान मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में बड़ा फर्जीवाड़े, एक नहीं दो बार दिलाया स्कीम का लाभ

Rajasthan News : राजस्थान मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस पूरे फर्जीवाड़े को जानकर चौंक जांएगे।

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Rajasthan Chief Minister Ayushman Accident Insurance Scheme Big Fraud Given Twice Benefit

Rajasthan News : भरतपुर में मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। ई-मित्र संचालकों ने फर्जी मामला और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट्स के जरिए लोगों को दो-दो बार योजना का लाभ दिलाया। जांच में तीन आवेदकों द्वारा 5-5 लाख रुपए का फर्जी भुगतान लेने का खुलासा हुआ है।

मुख्यालय स्तर से जांच शुरू

राज्य बीमा विभाग ने मुख्यालय स्तर से जांच शुरू कर ई-मित्र संचालकों को कठघरे में लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना, पूर्ववर्ती चिरंजीवी दुर्घटना बीमा योजना का नया रूप है। यह योजना दुर्घटना में मृत्यु पर 5 लाख और एक से अधिक मृत्यु पर 10 लाख रुपए का कवर देती है। इसमें हाथ, पैर या आंख की क्षति पर 1.5 से 3 लाख रुपए मिलते हैं।

ई-मित्र संचालकों पर कड़ी नजर

भरतपुर में सर्वाधिक फर्जीवाड़े के बाद प्रदेश में ई-मित्र संचालकों की जांच शुरू हो गई है। योजना में ग्रामीण क्षेत्रों की थ्रेसर, कुट्टी, आरा मशीन और बिजली दुर्घटनाएं शामिल हैं। पांचों विद्युत कंपनियों के कर्मचारी भी पात्र हैं। अधिकारियों का मानना है कि जांच से और खुलासे हो सकते हैं।

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पारो सहित अन्य पर मुकदमा

भरतपुर में पारो देवी ने अपने पति किशोरीलाल सैनी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु का दावा कर 19 नवंबर 2024 को आवेदन किया। जांच में मामला और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट फर्जी पाई गईं। वैर थाने में कोई मामला दर्ज नहीं था, और जयपुर के एसएमएस अस्पताल की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का केस नंबर किसी अन्य व्यक्ति का निकला। इसी तरह, रामकली, ओमप्रकाशी और आरती ने भी फर्जी दस्तावेज से 5-5 लाख रुपए हड़पे। विभाग ने पारो देवी सहित अन्य के खिलाफ वैर थाने में मुकदमा दर्ज कराया।

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एफआइआर दर्ज कराने के लिए निर्देशित

ई-मित्र संचालकों की ओर से मुख्यमंत्री आयुष्मान दुर्घटना बीमा योजना में फर्जीवाड़ा कर लाभ उठाने का मामला सामने आया है। परियोजना निदेशक की ओर से एफआइआर दर्ज कराने के लिए निर्देशित किया है।
गौरव कुमार, संयुक्त निदेशक राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग

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