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World AIDS Day : राजस्थान के इस जिले में अचानक बढ़ी एड्स के मरीजों की संख्या, अधिकतर युवा चपेट में, स्वास्थ्य विभाग चौंका

World AIDS Day : राजस्थान के इस जिले में एड्स के मरीजों की संख्या अचानक बढ़ रही है। खास बात यह है कि अधिकतर युवा ही एचआइवी की जकड़ में हैं। वहीं चिंताजनक बात यह है कि 15 वर्ष तक के 179 किशोर-किशोरी एड्स से पीड़ित हैं। इन आंकड़ों ने स्वास्थ्य विभाग को चौंका दिया है।

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Rajasthan this district sudden increase number of AIDS patients mostly young people affected health department shocked

विश्व एड्स दिवस आज। फोटो पत्रिका

World AIDS Day : भरतपुर जिले में एड्स के मरीजों की बढ़ती संख्या ने स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों को चौंका दिया है। सबसे खतरनाक तथ्य यह है कि इस जानलेवा बीमारी की चपेट में सबसे ज्यादा युवा आ रहे हैं। खास बात यह है कि 30 वर्ष तक की उम्र में ही 1191 मरीज सामने आना इस बात का संकेत है कि स्थिति कहीं अधिक गंभीर है, जितना सोचा जा रहा है।वर्ष 2013 के फरवरी माह में शुरू हुए आरबीएम अस्पताल के एआरटी सेंटर में अक्टूबर 2025 तक कुल 3334 पंजीकृत एड्स रोगी हैं। इनमें 1803 पुरुष, 1344 महिलाएं और 4 ट्रांसजेंडर शामिल हैं।

चिंताजनक बात यह है कि 15 वर्ष तक के 179 बच्चे भी संक्रमित हैं। इनमें 114 लड़के और 65 लड़कियां शामिल हैं, लेकिन सबसे बड़ा झटका 30 साल तक के मरीजों की संख्या से लगता है। इस आयु वर्ग में 1191 संक्रमित मरीज हैं, जिनमें 601 पुरुष, 589 महिलाएं और 1 ट्रांसजेंडर शामिल है। वहीं 30 साल से अधिक उम्र के 2143 मरीज दर्ज हैं। कुल मिलाकर आंकड़े साफ दिखाते हैं कि युवाओं में संक्रमण की रफ्तार सबसे ज्यादा है।

यह बढ़ता खतरा आखिर क्यों?

एड्स को लेकर जागरूकता फैलाने के प्रशासन के प्रयासों के बावजूद युवा तेजी से संक्रमित हो रहे हैं। विशेषज्ञ इसे सामाजिक झिझक, समय पर जांच न कराना, असुरक्षित व्यवहार और गलत धारणाओं की वजह मान रहे हैं। लोग अभी भी लक्षणों की अनदेखी कर देते हैं और कई संक्रमितों को वर्षों तक पता ही नहीं चलता कि वे एचआइवी पॉजिटिव हैं।

हल्के में न लें एचआइवी के लक्षण

एचआइवी शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है। संक्रमण के शुरुआती दिनों में बुखार, गला खराब, सिरदर्द व इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

धीरे-धीरे लिम्फ नोड्स सूजने, वजन घटने, बुखार, दस्त और खांसी जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं। उपचार नहीं मिलने पर यह घातक बीमारियों और कैंसर तक को जन्म देता है। एचआइवी संक्रमित व्यक्ति के रक्त, वीर्य, योनि द्रव, स्तनपान और मां से शिशु प्रसव के दौरान फैल सकता है, लेकिन सामान्य संपर्क से नहीं।

उपचार से रोका जा सकता है एड्स

एंटीरेट्रोवाइरल थैरेपी यानी एआरटी से एचआइवी को नियंत्रित किया जा सकता है। उपचार लेने वाले और जिनका वायरल लोड नहीं के बराबर होता है, वे दूसरों को वायरस नहीं फैलाते। समय पर जांच, परामर्श और उपचार सबसे जरूरी है। उपचार के बिना एचआइवी संक्रमण से ग्रस्त लोगों को गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। एचआइवी अन्य संक्रमण जैसे हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी और एमपीओएक्सए को बदतर बना सकता है।

यह महज आंकड़े नहीं

विशेषज्ञ कहते हैं कि यदि अब भी समाज जागा नहीं तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। युवा पीढ़ी को सुरक्षित व्यवहार, जागरूकता और समय पर जांच की सबसे ज्यादा जरूरत है।

असुरक्षित यौन शोषण न करें

एड्स से बचाव के लिए असुरक्षित यौन शोषण न करें, नशीली दवाओं का सेवन भी एक ही सिरिंज से करते हैं। अब टेटू का प्रचलन अधिक चल रहा है।
नगेन्द्र सिंह भदौरिया, अधीक्षक, आरबीएम चिकित्सालय, भरतपुर