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प्रदेश की पहली लेडी माउंटेनर नैना, ऊंचाई से लगता था डर…बुलंद हौसले से भागीरथी-2 पर लहराया तिरंगा

बचपन से ही मुझे स्पोट्र्स के क्षेत्र में बहुत ज्यादा रुचि रही है, लेकिन जीवन में अगर कुछ करना है तो डिफरेंट करना होगा।

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भिलाई

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Dakshi Sahu

Dec 11, 2017

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भिलाई. बचपन से ही मुझे स्पोट्र्स के क्षेत्र में बहुत ज्यादा रुचि रही है, लेकिन जीवन में अगर कुछ करना है तो डिफरेंट करना होगा। कहावत भी है, डर के आगे जीत है...घर पहुंचने में भले ही लेट क्यों ना हो जाए लेकिन मंजिल को पाना ही है। एेसा कहना है प्रदेश की पहली माउंटेनर नैना सिंह धाकड़ का।

बस्तर की रहने वाली नैना सिंह ने हाल ही में उत्तराखंड में माउंटेन भागीरथी-२ पर्वत पर ६५१२ मीटर की चढ़ाई पूरी कर तिरंगा फहराया। वे प्रदेश की पहली लेडी माउंटेनर हैं जो देश में अपने नाम के साथ छत्तीसगढ़ का भी नाम रोशन किया। उनका अगला टारगेट दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट है, जो वर्ष २०१८ का लक्ष्य है। नैना की पत्रिका प्लस से बातचीत के कुछ अंश...

जब मैं छोटी थी तो मुझे स्पोट्र्स बहुत पसंद था लेकिन हाइट से बहुत डर लगता था। कई बार एेसा होता था कि गांव के मेले में झूला भी झूलने से भी डरती थी, लेकिन आज वहीं डर मेरा पैशन है। इन सभी के साथ मेरी मां का बहुत साथ रहा है। सबसे ज्यादा कोई मुझे मोटिवेट किया है वो मेरी मां है।

मुझे याद है कि जब मैं उत्तराखंड में भागीरथी-२ के माउंटेनिंग के लिए जा रही थी तो मन में थोड़ा डर तो था, लेकिन खुद पर एक विश्वास था कि मुझे कुछ करना है। उसी समय मुझे याद है कि मेरी मां का फोन आया तो मैंने उनसे यही बात कही कि मां घर पहुंचने में देर भले भी हो जाए लेकिन मंजिल को पाना ही है।

दिक्कतें बहुत आईं लेकिन हिम्मत नहीं हारी
नैना बताती हैं कि जब स्पोट्र्स करती थीं तो उस टाइम हॉकी खेला करती थी। लेकिन समय के साथ गेम को छोडऩा पड़ा। परिवार का यही कहना था की बेटी बड़ी हो रही है तो छोटे कपड़े नहीं पहनेगी। जिसकी वजह से मैं इस गेम को छोड़कर बैंडमिंटन खेलना शुरू किया तो वहां भी सेम प्रॉब्लम फेस करना पड़ा। फिर मैं तय किया कि मुझे कुछ अलग करना है। तभी २०१० में एनएसएस कैंप द्वारा हिमांचल पर्वत में ट्रैकिंग के लिए भेजा गया। यह कैंप १५ दिन रहा। इस कैंप से मैंने सोच लिया था कि मुझे अब माउंटेनर बनना है। इसके साथ ही मैने कई पर्वतों की चढ़ाई की।

कई रिकॉर्ड किए अपने नाम
नैना बताती हैं कि वर्ष २०११ में टाटा स्टील में माध्यम से ट्रेंड डायरेक्टर रॉकी मार्टिन और शंकर पटेल द्वारा उनका चयन भारत की पहली पर्वतारोही बछेंद्री पाल की टीम के साथ भूटान के स्नोमेन ट्रेक में शामिल किया गया। इस टीम में देश के अलग-अलग राज्यों से १२ महिलाएं पहुंची थीं। इस ट्रैकिंग को पूरा किया जो लिम्का बुक ऑफ रिकार्ड में दर्ज हुआ।

सन् २०१२ में एचएमआई दार्जलिंग भेजा गया। २०१३ में हिमालय अन्नपूर्णा रेंज को पूरी की। इसके बाद २०१५ में अकेले माउंट आबू के स्वीम कंपलीट किया। २०१७ में साथ ही भगीरथी-२ को पूर्ण करने से पहले एक माह के लिए उत्तराखंड सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स किया और फिर उत्तराखंड में भागीरथी-२ को पर तिरंगा फहराकर प्रदेश की पहली माउंटेनर बनी।