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छत्तीसगढ़ बोर्ड 10वीं-12वीं का रिजल्ट जल्द होगा जारी, बच्चों की बढ़ी चिंता, इस तरह से परिजन बढ़ाएं उनका हौसला

CG News: पत्रिका ने इस संबंध में मशहूर मनोवैज्ञानिक व माध्यमिक शिक्षा मंडल की काउंसर डॉ. वर्षा वरवंडकर से चर्चा की। उन्होंने सबकी जिम्मेदारी तय कर दी है, जानिए… किसे क्या करना होगा, ताकि परीक्षा और परिणाम चाहे जो भी हो बच्चे भयभीत न महसूस करें।

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Chhattisgarh News: सीजी बोर्ड और सीबीएसई दोनों के नतीजे 10 मई तक घोषित हो सकते हैं। इससे पहले प्रदेशभर के विद्यार्थियों में नतीजों को लेकर बेचैनी और डर बढ़ गई है। अभी तीन दिन पहले कोरबा के एक छात्र ने परीक्षा में फेल होने के डर से जहर खा लिया। सिर्फ परीक्षा और नतीजों के प्रेशर में आकर अपनी कीमती जान गवां दी। भिलाई में भी बीते कुछ वर्षों में ऐसे ही दर्जनों मामले सामने आए हैं। परिणाम से पहले बच्चों के मन में चल रही दुविधा को कम करने की जिम्मेदारी सभी की है। पत्रिका ने इस संबंध में मशहूर मनोवैज्ञानिक व माध्यमिक शिक्षा मंडल की काउंसर डॉ. वर्षा वरवंडकर से चर्चा की। उन्होंने सबकी जिम्मेदारी तय कर दी है, जानिए… किसे क्या करना होगा, ताकि परीक्षा और परिणाम चाहे जो भी हो बच्चे भयभीत न महसूस करें।

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बच्चे खुद को रखें मोटिवेट

  • अगर एक बार असफल हो भी गए तो इसका मतलब यह नहीं कि आगे अच्छा नहीं कर सकते। दुनिया के कई नामी और सफल लोग अपने जीवन में कई बार असफल हुए हैं।
  • हौसला बरकरार रखें और आगे के लिए प्रयासरत रहें। मेहनत का फल जरूर मिलेगा।
  • खुद को अकेला नहीं रखें।
  • बातें अपने मन में नहीं रखें। दोस्तो-परिजनों से शेयर करें।
  • घबराएं नहीं। कुछ दिन खुद को मानसिक रूप से आराम दें, फिर तैयारी शुरू करें। आप जरूर सफल होंगे।

अभिभावक भी रखें ध्यान

  • अक्सर अभिभावक बच्चों से उनकी क्षमता से अधिक अपेक्षा रखते हैं, उसके पूरा नहीं होने पर बच्चों से बुरा बर्ताव किया जाता है। यह गलत है। बच्चों के डिप्रेस्ड होने या आत्महत्या करने का यही प्रमुख कारण बनता है।
  • अपने बच्चे की तुलना किसी और से नहीं करें।
  • डांटने और ताने देने की बजाए दोस्त बनकर उन्हें समझाएं, उन्हें अकेला न छोड़ें।
  • बच्चों के खान-पान का ख्याल रखें।
  • बेहतर होगा आप अपने बच्चे के साथ उसकी हर बात शेयर करें, इसका मतलब यह नहीं कि उसकी आजादी छीनें।

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स्कूल प्रबंधन भी समझे

  • आजकल सभी स्कूलों में काउंसलर होते हैं। प्रबंधन रिजल्ट के समय इनकी जिम्मेदारी तय करे कि वे कमजोर बच्चों की मनोस्थिति समझकर उन्हें प्रोटेक्ट करें।
  • प्रबंधन बच्चों को यह अहसास कराए कि यदि उनके नंबर कम भी आए हैं या वे फेल हुए हैं तो भी टीचर्स, स्कूल प्रबंधन और उनके दोस्तों का रवैया उनके लिए नहीं बदलेगा।

दोस्तों की भी है जिम्मेदारी

  • दोस्त परिवार के सदस्यों से भी ज्यादा क्लोज होते हैं। बच्चें अपने दोस्तों से हर बात शेयर करते हैं। यदि आपका दोस्त फेल हुआ या नंबर कम आए हैं तो यह आपकी भी जिम्मेदारी है कि उसकी मनोस्थिति समझकर पैरेंट्स को बताएं।
  • कभी भी अपने दोस्त को नीचा दिखाने की गलती न करें। इससे उसका मनोबल और कम होगा क्योंकि वह घर वालों से ज्यादा तवज्जो आपको देता है।
  • रिजल्ट के समय अपने दोस्त के साथ रहें, उसे यह अहसास कराएं कि सबकुछ ठीक होगा, तुम सबसे बेहतर हो, आगे अच्छा मुकाम हासिल करोगे।