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आईटीबीपी: सीमा पर दुश्मनों के छक्के छुड़ाने वाले जवान भी होते हैं पर्यावरण प्रेमी, पढ़ें खबर

भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान मैदानी इलाकों में खासकर छत्तीसगढ़ की धरती को हरा-भरा रखने में भी अपना योगदान दे रहे हैं।
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भिलाई

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Satya Narayan Shukla

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Updated: 5 Jun 2018, 10:32 PM IST

ITBP

आईटीबीपी: हिमवीरों ने पौधे रोप दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

भिलाई. भारत तिब्बत सीमा पुलिस के जवान जो माइनस टेपरेंचर में देश की करते हैं वे मैदानी इलाकों में तैनात जवान खासकर छत्तीसगढ़ की धरती को हरा-भरा रखने भी अपना योगदान दे रहे हैं। विश्व पर्यावरण दिवस पर मंगलवार को राजनांदगांव स्थित आईटीबीपी के सेक्टर हेडक्वार्टर कैंपस में पौधे लगाकर कैंपस में हरियाली बिखेरी। इस अवसर पर सेक्टर हेडक्र्वाटर के कमाडेंट, द्वितीय कमान अधिकारी सैय्यद जावेद अली, असिस्टेंट कमांडेंट रमेश कुमार, प्रदीप चौरसिया ने भी पौधे लगाकर प्रकृति को हराभरा बनाने का संकल्प लिया। इस मौके पर अधिकारियों ने कहा कि जितनी तेजी से प्रकृति का दोहन हो रहा है उससे कई गुना प्रदूषण बढ़ रहा है। आने वाली पीढ़ी को स्वच्छ वातावरण देने और उन्हें प्रकृति का स्पर्श महसूस कराने हमें पेड़ लगाने होंगे। उन्होंने जवानों से भी अपील की, कि वे साल में एक बार पौधे जरूर लगाएं।

चलाया स्वच्छता अभियान
पर्यावरण दिवस पर आईटीबीपी के जवानों ने बलदेव बाग क्षेत्र में स्वच्छता अभियान भी चलाया। यहां उन्होंने साफ-सफाईकर पॉलिथीन, कचरे को इक्ट्ठा किया। इस मंगलवार शाम तक चले इस स्वच्छता अभियान के जरिए जवानों ने लोगों को भी संदेश दिया कि अपने आसपास के स्थान को वे स्वयं साफ रखेंगे तो शहर अपने-आप स्वच्छ हो जाएगा। कमान अधिकारी ने बताया कि आईटीबीपी पर्यावरण के प्रति काफी सजग है और यह फोर्स जहां भी तैनात होती है अपने आसपास के क्षेत्र को खास बना देती है। उन्होंने बताया कि राजनांदगांव जिले में तैनान चारों बटालियन में भी पर्यावरण दिवस पर कई कार्यक्रम किए गए।

कैंप भी बनाया खूबसूरत
राजनांदगांव सेक्टर हेडक्वार्टर के अंतर्गत आने वाले सभी कैंप ऑपरेटिंग बेस को भी जवानों ने काफी खूबसूरत और हराभरा बनाया है। पानाबरस की नर्सरी के अलावा मानपुर, मोहला, छुरिया, डोंगरगढ़ इलाकों की सीओबी में भी हरियाली नजर आती है।यहां खाली समय में जवान पौधों की देखरेख करते हैं, ताकि कुछ ही सालों में ही उनका एरिया हराभरा हो जाए। जवानों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण के लिएपौधरोपणसे बेहतर दूसरा तरीका नहीं हो सकता।