31 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

इन घरों में ऐसी क्या खास बात है कि 724 परिवारों को निगम 10 साल से सिर्फ नोटिस ही दे रहा

जर्जर आवास को खाली कराने केवल कार्रवाई की दस्तूर निभा रही है। तीन मंजिला जर्जर आवास की सीढिय़ां हिल रही है।
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

भिलाई

•

image

Dakshi Sahu

•

Updated: 3 Apr 2018, 12:52 AM IST

bhilai Housing board housing

भिलाई . हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन वार्ड-26 औद्योगिक क्षेत्र के आवास जर्जर को खाली कराने के लिए पिछले 10 साल से नोटिस जारी कर रहा है, लेकिन जर्जर आवास को खाली कराने केवल कार्रवाई की दस्तूर निभा रही है। तीन मंजिला जर्जर आवास की सीढिय़ां हिल रही है।

खिड़की दरवाजे हवा में लटक रहे हैं। दीवारें दरक गई हैं। बावजूद इसके यहां 724 से अधिक परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं, जबकि नगर पालिक निगम प्रशासन ने हाउसिंग बोर्ड के आवास को 10 साल पहले 2007 में कंडम घोषित की है। आवासों की स्थिति को देखते हुए हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन को आवासों को खाली कराने के लिए कई बार पत्र भी लिख चुका है, लेकिन हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन नोटिस देने के बाद कार्रवाई की बात कहकर टालमटोल कर देता है।

हाउसिंग बोर्ड ने औद्योगिक क्षेत्र तीन मंजिला 24 ब्लॉक है। जिसमें 724 आवास हैं। १९८३-८४ में बोर्ड ने लोगों को 20 रुपए प्रतिमाह की दर से किराए पर दिया था, लेकिन कुछ लोगों ने ही बोर्ड में जलकर, बिजली का बिल सहित किराया जमा किया। नुकसान होने पर बोर्ड ने किराए पर रोक लगा दी। जिन लोगों ने किराए जमा किया है। उनके नाम आवास की रजिस्ट्री भी की।

कंडम घोषित होने के बाद रजिस्ट्रीधारी हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन आसपास के एरिया में नया आवास बनाकर देने की मांग कर रहे हैं। नया आवास बनाने के बाद ही पुराना आवास को छोडऩे की मांग पर अड़े हुए हैं, लेकिन हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन आवास को खाली कराने के बाद नया आवास बनाकर देने और लागत मूल्य की वसूली शर्त पर व्यवस्थापन की बात कहा रहा है।

प्रशासन भी मानता है खतरा

कंडम घोषित आवासों खाली कराने के मामले में निगम और जिला प्रशासन खतरा मानता है, लेकिन अब तक आवास को खाली कराने के लिए कोई ठोस पहल या चर्चा नहीं हुई है। हाउसिंग बोर्ड प्रबंधन ने अब तक अपनी मंशा भी स्पष्ट नहीं किया है।

आखिर क्यों नहीं छोड़ रहे अवास

निगम ने प्रशासन ने जिन आवासों को जर्जर घोषित किया है। वहां रहने वाले लोग पैसे बचाने के लालच में जान को खतरे में डाल रहे हैं। घोषित कंडम आवास में रहने वाले लोग हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र में ही बिना कोई समझौता के नए आवास की मांग पर अड़े हुए हैं।

आखिर कब टूटेंगे सभी जर्जर घोषित आवास

सवाल उठ रहा है कि आखिर जर्जर घोषित आवास कब टूटेगा? बीएसपी प्रबंधन चार पहले आवासों को अनफिट घोषित कर कछुआ चाल से कार्रवाई कर रही है। इधर हाउसिंग बोर्ड प्रशासन कार्रवाई के नाम पर सात साल से नोटिस पर नोटिस जारी कर खानापूर्ति कर रही है। इसी तरह के जर्जर भवन की ढहने की वजह से इंदौर में बड़ा हादसा हुई है।

आड़े आती है राजनीति

हाउसिंग बोर्ड के कंडम आवासों को खाली कराने में अब तक राजनीति ही सबसे बड़ा रोड़ा के रूप में उभरकर सामने आई है। स्थानीय नेता कंडम घोषित आवासों की कार्रवाई को अपने नफा और नुकसान के अनुसार इस्तेमाल कर रहे हैं।अधिकारी भी उनके इशारे पर काम रहे हैं। यही वजह है पिछले १० साल में आवास को ढहाने और रहवासियों की मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो पाया है।

हाउसिंग बोर्ड- हाउसिंग बोर्ड के आवासों को नगर पालिक निगम को कंडम घोषित करने का अधिकार है। आवास को कंडम घोषित करने पहले निगम, राजस्व और लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों की टीम सर्वे करती है। कंडम घोषित कर हाउसिंग बोर्ड को आवास को खाली कराने और ढहाने के लिए पत्र जारी किया जाता है। निगम हाउसिंग बोर्ड के औद्योगिक क्षेत्र के 724 आवास को 2007 में कंडम घोषित किया है।