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42 दिन में तैयार करना है रजिस्ट्री के लिए नई गाइड लाइन

अब तक सर्वे का पता और न ही मंगाए सुझाव। जिला प्रशासन फिर दिख रहे खानापूर्ति के आसार
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भिलाई

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Dakshi Sahu

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Updated: 20 Feb 2018, 7:01 AM IST

Registry Guide Line

भिलाई . रजिस्ट्री के लिए नई गाइड लाइन तैयार करने में फिर खानापूर्ति के आसार दिख रहे हैं। नए वित्तीय वर्ष को अब केवल 42 दिन रह गए हंै। इससे पहले बाजार भाव, डिमांड व उपलब्ध सुविधाओं के सर्वे करने के साथ लोगों से सुझाव के आधार पर गाइड लाइन तैयार किया जाना है, लेकिन अब तक न तो सर्वे शुरू हुआ है और न ही सुझाव मंगाए जा सके हैं।
कलक्टर गाइड लाइन तैयार करने की निश्चित प्रक्रिया है। इसके तहत गाइड लाइन का काम वित्तीय वर्ष प्रारंभ होने के पहले कर लिया जाना चाहिए, ताकि नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही नए दर पर रजिस्ट्री शुरू किया जा सके। चालू वित्तीय वर्ष अब समाप्ति की ओर है। नए वित्तीय वर्ष को अब केवल 42 दिन रह गए हैं, लेकिन जिले में अब तक गाइड लाइन तैयार करने का काम शुरू नहीं हो पाया है।

यह है कलक्टर गाइड लाइन

जमीन-मकान आदि की खरीदी-बिक्री के पंजीयन के लिए हर साल सरकारी गाइड लाइन तैयार किया जाता है। इसमें ग्रामीण, शहरी, कृषि, व्यवसायिक, भूखंड, मकान आदि के आधार पर अलग-अलग मूल्य तय होते हंै। इसी के आधार पर खरीदी-बिक्री की रजिस्ट्री पर शुल्क वसूल किया जाता है।

गाइड लाइन के लिए यह नियम

राजस्व अधिकारियों द्वारा बाजार दर व उपयोगिता के सर्वे के आधार पर प्रस्ताव तैयार किया जाता है। जिला मूल्यांकन समिति द्वारा इस प्रस्ताव पर आम जनता का सुझाव लिया जाता है। सुझावों के परीक्षण व दावा-आपत्तियों के निराकरण के बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की अनुशंसा लेकर दर लागू किया जाता है। यह कार्य मार्च खत्म होने से पहले किया जाना चाहिए।

सर्वे नहीं किया तभी आईं यह विसंगतियां

सर्वे और सुझाव के बिना अनुमान के आधार पर गाइड लाइन बनाए जाने से कीमतों में विसंगति की शिकायत रहती है। पिछले कई सालों से अनुमान के आधार पर ही गाइड लाइन बनाए जाते रहे हैं। इससे मौजूदा गाइड लाइन में कई जगहों पर सरकारी दर बाजार भाव से ज्यादा होने की शिकायत है।

इसलिए जरूरी है सर्वे व लोगों का सुझाव

बसाहट व सुविधाओं के विस्तार के साथ ही जमीन की खरीदी-बिक्री घटती-बढ़ती है। डिमांड बढऩे व घटने पर जमीन के बाजार भाव में भी घट-बढ़ होती है। इस उतार-चढ़ाव के अनुरूप रजिस्ट्री के लिए सरकारी कीमत तय की जा सके, इसके लिए हर साल सर्वे जरूरी है। सुझाव से सर्वे में संभावित त्रुटि से बचा जा सकता है।

बिना सर्वे व सुझाव के गाइड लाइन से यह नुकसान

आम लोगों को : गाइड लाइन के आधार पर पूरे साल रजिस्ट्री शुल्क लिया जाता है। गाइड लाइन में विसंगति से रजिस्ट्री शुल्क की गणना भी त्रुटिपूर्ण होगी। इससे बाजार में कम कीमत के जमीन-मकान की खरीदी पर भी अधिक रजिस्ट्री शुल्क देने जैसी स्थिति बन सकती है।

बिल्डर्स को : गाइड लाइन में डिमांड व विकास की संभावना सहित कई विषयों को देखकर कीमत तय की जाती है। इसमें गड़बड़ी से भवन व भूमि की कीमत बाजार की वास्तविक दर से ज्यादा दर्ज हो जाती है। ऐसी ही गड़बड़ी से कई सालों से भवनों की खरीदी बिक्री लगभग ठप्प है।

सरकार को : गाइड लाइन में विसंगति से सरकार को दोहरा नुकसान है। कीमत कम दर्ज होने से रजिस्ट्री से मिलने वाला शुल्क उसी अनुपात में घट जाएगा। वहीं कीमत ज्यादा होने पर खरीदी-बिक्री घट जाएगी। इससे भी सरकार को रजिस्ट्री शुल्क के रुप में राजस्व कम मिलेगा।

इस बार इन्हीं गड़बडिय़ों के कारण लक्ष्य का अब तक केवल 4० फीसदी रजिस्ट्री हो पाई है।

मौजूदा गाइड लाइन मेें यह है विसंगतियां
दुर्ग-भिलाई के अधिकतर क्षेत्र की कीमत बाजार दर से अधिक।
नगर निगम सीमा क्षेत्र में पॉश कालोनियों व उनके नजदीकी गांवों के जमीन की कीमत में खास अंतर नहीं।
नगर निगम सीमा से लगे गांवों की जमीन की कीमत की गणना शहरी स्लेब में।