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AI नहीं… परंपरा के अनुसार तैयार होंगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं, धार्मिक भावना का रखा जाएगा खास ध्यान…

Durga Utsav 2025: भिलाई जिले में मानव जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दखल तेजी बढ़ता जा रही है।

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AI नहीं... परंपरा के अनुसार तैयार होंगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं, धार्मिक भावना का रखा जाएगा खास ध्यान...(photo-patrika)

AI नहीं... परंपरा के अनुसार तैयार होंगी मां दुर्गा की प्रतिमाएं, धार्मिक भावना का रखा जाएगा खास ध्यान...(photo-patrika)

Durga Utsav 2025: छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में मानव जीवन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दखल तेजी बढ़ता जा रही है। गणेशोत्सव में एआई से बनी तस्वीरों के आधार पर प्रतिमाओं का निर्माण कराया गया, लेकिन दुर्गोत्सव पर ऐसा नहीं होगा।

गणेशोत्सव में एआई की मदद से तैयार प्रतिमाओं को लेकर विरोध की खबरें आईं। इसे देखते हुए इस बार थनौद के मूर्तिकारों ने ऐसी प्रतिमाओं का निर्माण नहीं करने का फैसला किया है। मूर्तिकारों का कहना है कि आयोजकों ने भी ऐसी प्रतिमाओं की डिमांड नहीं की है। उल्लेखनीय है कि थनौद में हर साल दो हजार से ज्यादा दुर्गा प्रतिमाओं का निर्माण होता है।

Durga Utsav 2025: जगदंबा स्वरूप की मांग

शिल्पग्राम थनौद मूर्तिकार लव चक्रधारी ने कहा की इस बार केवल धार्मिक व पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप प्रतिमाओं का निर्माण किया जा रहा है। एआई पर आधारित प्रतिमाओं को लेकर कुछ जगहों पर आपत्ति की खबर आई थी। दुर्गाजी की जगदम्बा स्वरूप की प्रतिमाओं की इस बार ज्यादा डिमांड है।

चक्रधारी बताते हैं कि प्रतिमा निर्माण के दौरान धार्मिक भावनाओं पर ध्यान रखा जाता है। कोशिश होती है कि प्रतिमाओं का स्वरूप पौराणिक मान्यताओं के अनुरूप रखा जाए। एआई के प्रयोग से गणेशोत्सव पर कुछ प्रतिमाओं को लेकर आपत्तियां सामने आई थी। इसे ध्यान में रखते हुए मान्यताओं के अनुरूप ही प्रतिमा निर्माण किया गया है।

अलग की चाह में एआई का चलन

प्रतिमाओं के निर्माण के लिए देशभर में विख्यात शिल्पग्राम थनौद के मूर्तिकार लव चक्रधारी बताते है कि पौराणिक मान्यताओं के आधार पर तैयार देवी-देवताओं की प्रतिमाएं लगभग एक जैसी होती हैं। ऐसे में एक ही तरह की प्रतिमाएं कई जगहों पर हो जाती हैं। अलग की चाह में प्रतिमाओं के निर्माण के लिए एआई जेनरेटेड तस्वीरों का इस्तेमाल का चलन बढ़ा था। ऐसी प्रतिमाओं में भाव-भंगिमा, डिजाइन, रंगाई व साज-सज्जा मनचाहे ढंग से कराई जा सकती थी।