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क्या आप भी मिनरल वॉटर पीकर बुझाते हैं प्यास, तो इस खबर को जरूर पढि़ए

बाजार में मिलने वाली पानी की थैली व जार भले कुछ देर के लिए आपका गला तर कर दे, लेकिन सेहत के लिए खतरनाक है।
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भिलाई

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Dakshi Sahu

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Updated: 14 Apr 2018, 1:14 PM IST

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राजनांदगांव. बाजार में मिलने वाली पानी की थैली व जार भले कुछ देर के लिए आपका गला तर कर दे, लेकिन सेहत के लिए खतरनाक है। जी हां जिले में आरओ-मिनरल वाटर के नाम पर लोगों को बीमारियां परोसी जा रही हैं। बिना लाइसेंस के चल रहे वॉटर प्लांट का पानी अशुद्ध है। वहीं जगह-जगह ठंडकता के नाम पर केमिकल युक्त जूस की बिक्री जोरों पर है।

वावजूद इसके जिम्मेदार विभाग खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अधिकारी नींद में हैं। अब तक बाजार में बिक रहे पानी व जूस की शुद्धता की जांच नहीं की जा रही है। अमानक स्तर के पानी का सेवन करने से लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। गौरतलब है कि गर्मी बढ़ते ही लोकल ब्रांड पानी पाउच व बोतल बंद मिनरल वाटर की सप्लाई बढ़ गई है।

कम से कम दाम पर ये पानी पाउच व बोतलें जगह-जगह बिक रही है। रोजाना हजारों बैग बिकने वाले पानी पाउच की शुद्धता से भी लोग अनजान हैं। बावजूद इसका रोजमर्रा के उपयोग के लिए लोग खूब खरीदी कर रहे हंै। मिली जानकारी के अनुसार शहर में दर्जनभर फर्म है ंजो आरओ वाटर के नाम पर जार की सप्लाई कर रहे हैं। व्यापारी अपना आरओ प्लांट भी लगा रखा है और 20-20 लीटर के जार में रोजाना हजारों लीटर पानी की सप्लाई शहर में कर रहे हंै।

रोजाना औसत 5 से 6 लाख लीटर तक पानी की बिक्री हो रहा है। पानी का यह धंधा रोजना लाखों रुपए का है। शहर में जितने भी फर्म आरओ वाटर की सप्लाई कर रहे हैं। वह सभी लोकल ब्रांड हैं। ऐसे में इनके फिल्टर प्लांट में जरुरी मानक के पालन को लेकर भी कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सभी आरओ प्लांट में पानी का सोर्स ट्यूबवेल ही है। ऐसे में इस पानी को आरओ के नाम पर किस हद तक उपचारित किया जा रहा है यह बड़ा सवाल है।

शहर में आरओ वाटर के नाम पर रोजाना लाखों का व्यापार हो रहा है। दुकान से लेकर आफिस, घरों व शादियों सहित अन्य समारोहों में आरओ वाटर जार का ही इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन इसकी शुद्धता को लेकर किसी के पास कोई जानकारी नहीं है। लोगों को यह तक पता नहीं है कि उन्हें आरओ वाटर के नाम पर कौन सा पानी पिलाया जा रहा है।

ये स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है। अधिकारी खाद्य औषधि एवं सुरक्षा विभाग नेमीचंद पटेल ने बताया कि प्लांटों से सप्लाई हो रहे आरओ वाटर की जांच नहीं हुई है। जल्द ही जांच के लिए शहर में अभियान चलाया जाएगा। खामियां सामने आने पर संचालकों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

इसके अलावा जिले में तीन जगहों पर मिनरल वाटर प्लांट संचालित हो रहा है। इन जगहों पर बोतल व पाउच की पैकिंग कर सप्लाई किया जा रहा है। खैरागढ़, गंडई और डोंगरगांव में प्लांट लगा हुआ है। यहां पर भी पानी की शुद्धता जांचने किसी तरह की पहल नहीं हुई है। भारतीय मानक ब्यूरो ने पैकेज्ड पानी प्लांट संचालन के लिए नियम लागू किए हैं। इसके तहत प्लांट में पानी की नियमित चेकिंग के लिए एक निजी लैब और लैब टेक्नीशियन की तैनाती होनी चाहिए। इन नियमों का पालन हो रहा या नहीं यह भी जांच का विषय है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा निर्धारित मापदंड
फ्लोराइड की मात्रा 0.5 से 1.5 मिली
घुलनशील लवण 500 से 1500 मिली
नाइट्रेट की मात्रा 0 से 45 मिली
क्लोराइड की मात्रा 10 से 500 मिली
पीएचपीए की मात्रा 6.5 से 8.5 मिली