
CG Tax News: जैसे-जैसे वित्तीय वर्ष 2024-25 समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे करदाताओं और व्यापारियों के लिए यह आवश्यक हो जाता है कि वे अपने सभी वित्तीय एवं कर संबंधी अनुपालनों की समय रहते समीक्षा करें। एक भी चूक उन्हें भारी कर भार, ब्याज, दंड एवं कानूनी विवादों की ओर ले जा सकती है। विशेषकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों, व्यापारिक प्रतिष्ठानों और करदाताओं के लिए मार्च का महीना सबसे अहम है।
सीए पीयूष जैन ने बताया कि, पिछले वर्ष के वित्त विधेयक के अनुसार यदि कोई करदाता रजिस्टर्ड सूक्ष्म या लघु उद्यम से माल या सेवा खरीदता है, तो उसे निर्धारित समयावधि में भुगतान करना आवश्यक है। यदि क्रेता और विक्रेता के बीच कोई लिखित अनुबंध नहीं है, तो भुगतान 15 दिनों में, और यदि लिखित अनुबंध है तो 45 दिनों में करना होगा।
यह ध्यान देने योग्य है कि यह प्रावधान केवल सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों से की गई खरीद पर लागू होता है, जबकि व्यापारियों, ट्रेडर्स या अन्य विक्रेताओं से की गई खरीद पर यह लागू नहीं होगा।
केंद्र सरकार ने जीएसटी के शुरुआती वर्षों में करदाताओं को हुई व्यावहारिक कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए धारा 12बी के अंतर्गत एक विशेष राहत योजना लागू की है। इसके अनुसार, यदि किसी करदाता के खिलाफ वित्तीय वर्ष 2017-18, 2018-19 या 2019-20 के लिए सेक्शन 73 के अंतर्गत डिमांड नोटिस जारी हुआ है, तो वह करदाता यदि 31 मार्च 2025 तक पूरा टैक्स चुका देता है, तो उस पर लगाया गया ब्याज और पेनल्टी माफ कर दिया जाएगा। इसका लाभ करदाता को मिलेगा।
Updated on:
28 Mar 2025 11:18 am
Published on:
28 Mar 2025 11:17 am
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