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मासूम को धर्म प्रचार के लिए सौंपने की घोषणा करने वाले दंपती तलब

ढाई माह के बच्चे को बौद्ध भिक्षु बनाने की घोषणा करने वाले दंपती को पक्ष रखने के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा।
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भिलाई

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Nitin Tripathi

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Updated: 2 Apr 2018, 1:53 PM IST

Patrika

राजनांदगांव . अपने ढाई माह के दुधमुंहे बच्चे को बौद्ध भिक्षु बनाने की घोषणा करने वाले दंपती को बाल कल्याण समिति ने नोटिस जारी कर दिया है। दंपती को उनका पक्ष रखने के लिए जिला बाल संरक्षण अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा।
जिला बाल संरक्षण अधिकारी चंद्रकिशोर लाड़े ने बच्चे के पिता संदीप कोल्हाटकर की शहर में मौजूदगी नहीं होने पर उनसे फोन पर संपर्क किया। इस दौरान दंपती को तलब किया गया है। लाड़े ने पत्रिका को बताया कि मासूम बच्चे को धर्म प्रचार के लिए दान देने के मामले में स्पष्टीकरण के लिए बच्चे के माता और पिता दोनों को बुलाया गया है। ये दोनों सोमवार को बाल कल्याण समिति के सामने पेश होंगे। बाल कल्याण समिति के पांच सदस्यीय कमेटी के सदस्य सरिता सिन्हा, सुनीता महाजन, कुलप्रकाश वाल्दे, सरिता भोजवानी और दीप्ति गोमास्ता के सामने दोनों का बयान होगा।

राष्ट्रीय आयोग में शिकायत
अपने दो माह के मासूम बच्चे को बौद्ध भिक्षु बनाने को राज्य बाल संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य शरद श्रीवास्तव ने किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 का उल्लंघन और बाल अधिकार का हनन बताया है। अधिनियम का हवाला देते हुए मामले की शिकायत राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग में की है।

पत्रिका में सबसे पहले
राजनांदगांव के शांति नगर में रहने वाले 30 वर्षीय संदीप कोल्हाटकर और उनकी धर्मपत्नी पूनम ने 21 जनवरी को जन्मे अपने पुत्र को बौद्ध समाज के प्रचार-प्रसार के लिए समाज को समर्पित करने की घोषणा की है। उनके अनुसार सात वर्ष की उम्र तक बालक अपने माता-पिता के साथ रहेगा। पत्रिका में '2 माह के बच्चे को बौद्ध भिक्षु बनाने का एलान, सात वर्ष तक रहेगा माता पिता के संगÓ शीर्षक के साथ समाचार प्रकाशित होने पर मामला सामने आया है। इसके बाद मामला संज्ञान में आया।
बड़ा सवाल : बच्चे को क्यों न मिले माता-पिता का साथ
शिकायत में सवाल उठाया गया है कि बच्चे को भले ही सात वर्ष तक माता-पिता अपने साथ रखेंगे, लेकिन उसके बाद बच्चे को बौद्ध भिक्षु बनाने के लिए सौंप देना कहां तक उचित है? क्या उस बच्चे को अधिकार नहीं कि उसकी परवरिश माता-पिता करें, उसे भी परिवार का सुख मिले?