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भीलवाड़ा जिले में 81 सरकारी स्कूल होंगे बंद! जानें टीचरों का क्या होगा, DEO से मांगी रिपोर्ट

भीलवाड़ा में कम नामांकन वाले सरकारी स्कूलों पर शिक्षा विभाग सख्त हो गया है। जिले में ऐसे 81 स्कूल हैं, जहां 1 से 10 तक ही छात्र पढ़ रहे हैं। शिक्षा निदेशालय ने सभी डीईओ से 9 दिसंबर तक शाला दर्पण आधारित विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

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Bhilwara 81 government schools

शिक्षा विभाग भीलवाड़ा (फोटो- पत्रिका)

भीलवाड़ा: राज्य के सरकारी प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में लगातार घटते नामांकन को देखते हुए शिक्षा निदेशालय ने सख्त रुख अपनाया है। विशेष रूप से उन स्कूलों पर ध्यान केंद्रित किया गया है, जहां छात्रों की संख्या 1 से 10 के बीच है।

ऐसे स्कूलों के भविष्य को लेकर शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से निर्धारित समय सीमा के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। विभाग का कहना है कि रिपोर्ट के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि इन स्कूलों को जारी रखा जाए, बंद किया जाए या आसपास के किसी बड़े संस्थान में विलय किया जाए।

जिले में वर्तमान में ऐसे 81 सरकारी स्कूल हैं, जहां छात्रों का नामांकन 10 या उससे कम है। सरकार ने कम नामांकन वाले स्कूलों की समीक्षा संबंधी आदेश 25 नवंबर को जारी किए थे। इसके बाद ‘शाला दर्पण’ पोर्टल पर 20 नवंबर तक दर्ज आंकड़ों के आधार पर सभी जिलों को स्कूलों की सूची भेजी गई है। सबसे कम नामांकन वाला ब्लॉक करेड़ा है, जहां 12 विद्यालयों में छात्रों की संख्या बेहद कम है, जबकि शिक्षकों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक है।

शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि निर्धारित प्रारूप में सभी आवश्यक कॉलम सही तरीके से भरकर 9 दिसंबर तक रिपोर्ट भेजना अनिवार्य होगा। निर्देशों के साथ स्पष्ट चेतावनी भी दी गई है कि यदि रिपोर्ट समय पर जमा नहीं हुई या उसमें किसी प्रकार की त्रुटि पाई गई, तो 10 दिसंबर को सुबह 10 बजे संबंधित कार्यालय के कार्मिक को व्यक्तिगत रूप से बुलाकर अधूरी सूचना तैयार करवाई जाएगी। ऐसे मामलों में समय की पालना नहीं करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।

आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि चुनावी कार्यों में व्यस्त कार्मिकों की वजह से रिपोर्ट तैयार करने में देरी नहीं होनी चाहिए। यदि किसी स्कूल का कर्मचारी चुनाव कार्य में नियुक्त है, तो डीईओ को बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक, सूचना सहायक या अन्य उपलब्ध कर्मचारियों की सहायता लेकर समय पर रिपोर्ट तैयार करनी होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी स्थिति में समय सीमा बढ़ाई नहीं जाएगी।

शिक्षा विभाग इससे पहले शून्य नामांकन वाले स्कूलों की रिपोर्ट भी मांगा चुका है। ऐसे स्कूलों की संख्या प्रदेश में सैकड़ों में है, लेकिन इनके भविष्य पर अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। विभाग की मानें तो यदि इन स्कूलों में आने वाले समय में नामांकन में सुधार नहीं होता, तो इन्हें बंद करने का निर्णय लिया जा सकता है। अब 1 से 10 छात्र संख्या वाले स्कूलों की रिपोर्ट मिलने के बाद माना जा रहा है कि शिक्षा विभाग युक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम उठा सकता है, जिसके तहत शिक्षकों और संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा।

भीलवाड़ा जिले की बात करें तो हुरड़ा और मांडलगढ़ ब्लॉक में 1-1 स्कूल, जहाजपुर में 2, बनेड़ा में 3, मांडल और बिजौलियां में 5-5, सहाड़ा में 7, कोटड़ी और रायपुर में 9-9, आसींद में 11, सुवाणा में 12 और करेड़ा में सबसे अधिक 13 स्कूल शामिल हैं, जहां नामांकन 10 से कम है।

इन सभी रिपोर्टों और आंकड़ों का उद्देश्य प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारना, संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और कम बच्चों वाले ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्कूलों की वास्तविक आवश्यकता का आकलन करना है। विभाग का मानना है कि समय पर लिए गए निर्णय से शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी, सुव्यवस्थित और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सकेगा।

भीलवाड़ा जिले की स्थिति

नामांकन (छात्र संख्या)स्कूलों की संख्या
22
33
45
54
68
76
812
916
1025
कुल81
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