
कैलाश बिड़ला (फोटो - पत्रिका)
भीलवाड़ा: नगर विकास न्यास का रिटायर्ड कर्मचारी अपनी जमीन को ही अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए जूझ रहा है। 31 साल के संघर्ष के बावजूद न्यास मददगार नहीं बन सका। इस अवधि में कर्मचारी ने सियासी गलियारे से लेकर आला अधिकारियों को पीड़ा बयां की, लेकिन समाधान की राह निकलने के बजाए परेशानी और बढ़ती गई।
राजस्थान पत्रिका के जन मंच में न्यास के रिटायर्ड कर्मचारी 71 वर्षीय कैलाश बिड़ला ने यह पीड़ा बयां की। उन्होंने बताया कि वह न्यास का प्रथम कार्मिक था। 1 फरवरी 1968 से लेकर 31 जुलाई 2000 तक कार्यकाल रहा। सेवा अवधि के दौरान ही वर्ष 1973 में काशीपुरी रेलवे लाइन मार्ग पर हरिजन बस्ती के समीप 18 बिस्वा खातेदारी भूमि खरीदी, लेकिन न्यास के ही कुछ कर्मियों की सांठगांठ से प्रभावशाली लोगों ने जमीन पर कब्जे की नीयत से अवैध झोपड़ियां बनवा दीं।
इस आशय की शिकायत जिला प्रशासन को करने पर वर्ष 2009 में उप जिला कलेक्टर (एसडीएम) ने डिग्री जारी कर वर्णित व्यक्तियों को बेदखली के आदेश जारी भी किए। लेकिन अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की योजना बनाने में ही न्यास ने दस साल लगा दिए। वर्ष 2019 में पुलिस जाब्ता मिलने के बावजूद नगर विकास न्यास ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई ही नहीं की।
बिड़ला की पीड़ा है कि न्यास का रिटायर्ड कर्मचारी होने के बावजूद न्यास उसकी मदद नहीं कर रहा है, ऐसे में राजस्थान पत्रिका के जन मंच के जरिए ही न्याय मिलने की आस रह गई है। बिड़ला ने बताया कि बेशकीमती जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने की मुहिम न्यास के रोक देने पर मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और संभागीय आयुक्त तक गुहार की, लेकिन जमीन अतिक्रमियों के कब्जे से मुक्त नहीं हो सकी।
वर्ष 2022 में सतर्कता समिति ने न्यास के ही अतिक्रमण हटाने बाबत निर्णय किया। इसके बावजूद न्यास प्रभावशालियों के दबाव में कार्रवाई करने से कतरा रहा है। जमीन पर अभी सोलह लोगों का कच्चा और पक्का अतिक्रमण है।
Published on:
27 Aug 2025 02:31 pm
