इसके बाद 18 जुलाई को योजना को अंजाम दिया गया। कार में लौटते समय नारायण ने शोभालाल श्रीमाल के हाथ पकड़ लिए, जबकि रोशन ने उनका गला दबाकर हत्या कर दी। आरोपियों को डर था कि कहीं वह दोबारा होश में न आ जाएं, इसलिए पहले से साथ लाए गए टेप से उनका मुंह पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद पहले से चिन्हित कुएं में शव फेंक दिया और रुपए लेकर फरार हो गए। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि मध्यप्रदेश में पानी-पूरी का ठेला लगाने वाले नारायण को हत्या के बदले 10 लाख रुपए देने का सौदा हुआ था।