उनके आवास व अन्य सुविधाओं के लिए न तो सरकार ने ध्यान दिया और न ही श्रमिकों के हितों का दम भरने वाले श्रमिक नेताओं ने सकारात्मक कदम उठाए। सरकारी और राजनीतिक उदासीनता के कारण औद्योगिक विकास की नींव रखने वाले श्रमिक अपने परिवारों के साथ आज भी जवाहरनगर, कांवाखेड़ा, बाबा धाम, पटेल नगर, मजदूर कॉलोनी, चपरासी कॉलोनी सहित अन्य बस्तियों में किराए के मकान में जीवन बिताने को विवश हैं। हजारों श्रमिक शहर की कच्ची बस्तियों में रह रहे हैं।