
Dera Sacha Sauda
भिवानी । सच्चा सौदा सिरसा में चल रहे सर्च अभियान के दौरान पिछले 8 साल से दादरी जिलेे के गांव तिवाला के एक परिवार को आश बंधी है कि सर्च के दौरान उनकी बेटी श्रद्धा के बारे में जानकारी मिलेगी और वे सकुशल घर आ जाएगा। हालांकि परिजनों को ये मालूम नहीं कि 7 साल से उनकी बेटी कैसा जीवन जी रही है या जिंदा भी है। परिवार का सरकार व प्रशासन से विश्वास उठ चुका है लेकिन अब उनको फिर से आश बंधी है कि बेटी श्रद्धा के बारे में कुछ पता चलेगा।
दादरी जिलेे के गांव तिवाला निवासी राजेश देवी ने अपनी पारिवारिक हालत को देखते हुए अपनी भतीजी रेनू उर्फ श्रद्धा व भतीजा संजीव उर्फ जयजीत को करीब 10 वर्ष पूर्व पढ़ाई और परवरिश के लिए डेरा सच्चा सौदा सिरसा में भेजा था। तीन साल तक सब ठीक चलता रहा लेकिन बाद में बेटी रेनू उर्फ श्रद्धा से परिजनों का मिलान-जुलना बंद कर दिया। हालांकि बेटा संजीव उर्फ जयजीत चोरी-छिपे परिजनों से मिलता और कभी कभार घर भी आता रहता था।
जयजीत को भी डेरे में अपनी बहन श्रद्धा से नहीं मिलने दिया गया। पिछले 7 साल से अपनी भतीजी की शक्ल देखने के लिए तड़प रही मौसी राजेश का दर्द सामने आया। राजेश ने रोते हुए बताया कि मेरी भतीजी कैसी है और उसके साथ क्या हो रहा है। जिंदा भी या फिर डेरे वालों ने उसको मार दिया। जब से सिरसा डेरे के बारे में घिनौनी बातें सामने आई है तब सेे उसकी रातों की नींद उड़ी हुई है। ऐसे खवाब उसके मन में बार-बार आ रहे हैं। हालांकि राजेश कहती है कि उसकी भतीजी को बंधक जरूर बना रखा है एक दिन पूरे खेेल का पटाक्षेप होगा और बेटी घर जरूर आएगी।
श्रद्धा के चचेरे भाई परमिंद्र का कहना है कि सिरसा व दादरी प्रशासन सेे कई बार मिलकर बहन को डेरे के बंधक से मुक्त करवाने के लिए अनेकों बार प्रशासनिक अधिकारियों से मिल चुके हैं। वहीं राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को भी पत्र लिख चुके हैं। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। अब न्यायालय द्वारा डेरे में सर्च अभियान शुरू किया है तो उनकी भी आश बंध गई है कि बहन श्रद्धा के बारे में कुछ जानकारी मिलेगी।
Published on:
09 Sept 2017 11:30 pm
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