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22 हजार स्ट्रीट वेंडरों से हर साल होती है 2.20 करोड़ कमाई, फिर ये अवैध कैसे ?

22 हजार कारोबारियों को निगम अवैध दुकानदार बताता है। जबकि, निगम की ही राजस्व शाखा इनसे सालभर में कम से कम 2.20 करोड़ वसूलती है।

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22 हजार स्ट्रीट वेंडरों से हर साल होती है 2.20 करोड़ कमाई, फिर ये अवैध कैसे ?

भोपाल. नगर निगम की मोबाइल कोर्ट ने न्यू मार्केट के 70 से अधिक हॉकर्स और स्ट्रीट वेंडर्स का चालान कर व्यापारियों को आक्रोशित कर दिया है। दुकानदारों का कहना है कि, पटरी दुकानदारों से लेकर बड़े बाजारों में ठेलों आदि पर कारोबार करने करीब 22 हजार कारोबारियों को निगम अवैध दुकानदार बताता है। जबकि, निगम की ही राजस्व शाखा इनसे सालभर में कम से कम 2.20 करोड़ वसूलती है। ऐसे में यह निगम का दोहरा चरित्र है।


ये है स्ट्रीट वेंडर एक्ट

पथ विक्रेता (जीविका संरक्षण और पथ विक्रय विनियमन) अधिनियम 2014 में बना था। यह स्ट्रीट वेंडर को ऐसे व्यक्ति के रूप में परिभाषित करता है, जो किसी भी सार्वजनिक स्थान या निजी क्षेत्र पर, किसी अस्थायी जगह पर बने ढांचे से या जगह-जगह घूमकर सेवाओं की पेशकश करता है। यह एक्ट संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गरिमा के साथ जीने के अधिकार के क्रम में विक्रेताओं और फेरीवालों को मौलिक अधिकार देता है। लेकिन हॉकरों को शहर की हर सड़क पर व्यापार की अनुमति नहीं है। विधेयक की धारा 29 स्ट्रीट वेंडर्स को पुलिस और अन्य प्राधिकारियों द्वारा उत्पीड़न से बचाने का प्रावधान करती है।

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500 हॉकर्स कॉर्नर विकसित हों

इस संबंध में महापौर मालती राय का कहना है कि, निगम के नियमों और विभागों के बीच सामंजस्य बनाने की कोशिश जारी है। अवैध हॉकर्स और अवैध निर्माण के मामलों में जल्द ही नए नियम बनाए जाएंगे। वन टाइम तहबाजारी इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

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निगम के दोहरेपन के ये दो उदाहरण ही काफी...

गुरुवार को न्यू मार्केट में हॉकर्स को अतिक्रमणकारी बताया गया। इनसे निगम की राजस्व शाखा रोजाना 12 हजार रुपए तहबाजारी वसूलती है।

अरेरा कॉलोनी में आवासीय परिसरों में व्यावसायिक उपयोग पर निगम की भवन अनुज्ञा शाखा ने 62 को नोटिस दिया। ये सभी हाईकोर्ट गए। तर्क दिया गया जब निगम संपत्तिकर व्यावसायिक दर से वसूलता है। निगम ने ही व्यावसायिक लायसेंस दिया है तो उपयोग अवैध कैसे? कोर्ट से स्टे मिल गया।

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