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टाइगर स्टेट पर संकट : 2 दिन में 3 बाघों की मौत, तीन माह में 12 बाघ गवा चुके हैं जान

बीते दो दिन में ही तीन बाघों की मौत हो चुकी है। इससे पहले जनवरी से मार्च तक 12, जबकि अप्रैल के शुरुआती तीन दिन में दो बाघ मर चुके हैं।

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टाइगर स्टेट पर संकट : 2 दिन में 3 बाघों की मौत, तीन माह में 12 बाघ गवा चुके हैं जान

भोपाल. जंगल में वनराज सुरक्षित नहीं हैं। मध्य प्रदेश में बीते दो दिन में ही तीन बाघों की मौत हो चुकी है। इससे पहले जनवरी से मार्च तक 12, जबकि अप्रैल के शुरुआती तीन दिन में दो बाघ मर चुके हैं। यानी औसतन हर महीने तीन बाघ दम तोड़ रहे हैं। देशभर में बाघों की मौत की तुलना में देखें तो यह 47 फीसदी है। यानी इस अवधि में पूरे देश में 32 बाघ मरे।

आंकड़े बताते हैं कि, अब जंगल का राजा ही खतरे में है। इसके उलट वन अफसर ज्यादातर मामलों में मौत की वजह टेरेटोरियल फाइट (आपसी संघर्ष या वर्चस्व की लड़ाई) बताते हैं। दूसरी बड़ी वजह बीमारी बताई जाती है।

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तो छिन जाएगा टाइगर स्टेट का तमगा!

प्रदेश में कई बाघ-बाघिनों की मौत रहस्य बनी हुई है। कई मामलों में शिकार के साक्ष्य भी मिले, लेकिन अफसर गुत्थी नहीं सुलझा सके। हालात यह हैं कि, जंगलों में कहीं करंट का जाल बिछाया जा रहा है तो कहीं जहर से वन्यजीवों की जान ली जा रही है। बाघों की लगातार मौत से मध्य प्रदेश से टाइगर स्टेट का तमगा फिसल सकता है। इसकी वजह यह है कि 2018 की गणना में मप्र में जहां 526 बाघ पाए गए थे, वहीं 524 बाघों के साथ कर्नाटक दूसरे पायदान पर था। हालांकि, इस दरम्यान मध्य प्रदेश में बाघ बढ़े भी हैं, लेकिन ज्यादा खबरें मौत की आई हैं।


2 दिन में 3 बाघों की मौत

-2 अप्रैल: नर्मदापुरम

सतपुड़ा रिजर्व में मादा शावक की मौत हुई। अफसरों ने कारण टेरेटोरियल फाइट बताया, जबकि पोस्टमार्टम में शावक के गले, चेहरे, पीठ पर चोट के निशान मिले। पसलियां-रीढ़ की हड्डी टूटी थी।

-3 अप्रैल: बालाघाट

जिले में एक और नर बाघ की मौत हो गई। अधिकारियों ने इसे टेरेटोरियल फाइट (आपसी संघर्ष) बताया है। मामला जिले के लालबर्रा वन परिक्षेत्र का है। बाघ की उम्र करीब 20 माह थी।

-3 अप्रेल: नर्मदापुरम

एसटीआर में ही रविवार को घायल मिले एक बाघ को वन विहार भेजते समय उसकी मौत हो गई। बाघ के गले, दोनों पैरों व शरीर पर जगह-जगह चोट के निशान मिले हैं। उसका केनाइन दांत भी टूटा था।

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देशभर में मौत के टॉप 3 राज्यों में पहले पायदान पर MP

-वर्ष 2021 और 22 के आंकड़ों पर गौर करें तो इन दोनों वर्षों में देशभर में सबसे ज्यादा बाघों की मौत मध्य प्रदेश में ही हुई है। यहां वर्ष 2021 में 42 तो 2022 की 29 मार्च तक 12 बाघों की मौत हुई है।

-दूसरे पायदान पर है महाराष्ट्र यहां वर्ष 2021 में 27 बाघों की मौत हुई है, जबकि 2022 में 29 मार्च तक प्राप्त आंकड़ं के अनुसार, 8 बाघों की मौत हुई है।

-तीसरे नंबर पर है कर्नाटक, यहां वर्ष 2021 में 15 बाघों की मौत हुई है, जबकि 2022 में 29 मार्च तक यहां 6 बाघ जान गंवा चुके हैं।

जवाब देही तय हो

मामले को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ अजय दुबे का कहना है कि, बाघों की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं शाकाहारी जीव। इनके लिए घास के मैदान का क्षेत्रफल बढ़ाया जाए। शाकाहारी जीव नहीं होंगे तो बाघ भूखे मर जाएंगे। दूसरा नए क्षेत्रों को टाइगर रिजर्व घोषित करना चाहिए। ऐसे ही बाघ की मौत के लिए जिम्मेदारी तय हो।

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